अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने सीरियाई प्रशासन के खिलाफ अपने वर्तमान प्रतिबंधों को और कड़ा करने की प्रतिबद्धता जताई है। अमेरिका ने कहा है कि वह सीरिया को वित्तीय मदद रोकने और हथियारों की आपूर्ति को रोक देगा।
हिलेरी ने सोफिया में रविवार को कहा कि हम सीरिया के खिलाफ क्षेत्रीय और राष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने का प्रयास करेंगे। ताकि वित्तीय और हथियारों की मदद के स्रोतों को खत्म किया जा सके।
दूसरी तरफ विश्व में मुस्लिमों के सबसे बडे़ संगठन ओआईसी ने बयान जारी कर कहा कि रूस और चीन द्वारा मसौदा प्रस्ताव पर वीटो किए जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद एक समझौते पर पहुंचने में असफल रहा जो बहुत दुखद है।
इस बीच अमेरिका के एक प्रमुख सीनेटर जो लिबरमैन ने कहा है कि यदि चीन और रूस अपने वीटों पर पुनर्विचार नहीं करे तो अमेरिका को सीरिया के विद्रोहियों को हथियार और अन्य सहायता दिए जाने पर विचार करना चाहिए।
उधर ने इजराइल ने सीरिया संकट में खुद के शामिल होने की बात को खारिज कर दिया। इजराइल ने कहा कि वह बशर अल असद के शासन का अंत से अपेक्षाकृत उदारवादी मानी जाने वाली सुन्नी शक्तियां दमिश्क में सत्ता में आ सकती हैं।
सीरिया के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आए प्रस्ताव पर वीटो पर आलोचनाओं के बीच रूस और चीन दोनों ने जोर देकर कहा कि परिषद का आधा अधूरा प्रस्ताव संकट का समाधान करने के बजाय दोनों ही शत्रु पक्षों में केवल असंतुलित संकेत देता है। रूस और चीन दोनों ही सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर मतदान के दौरान सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद की हिमायत की।
मास्को और बीजिंग में वीटो का समर्थन करते हुए कहा कि प्रस्ताव के मसौदे पर और काम करने की जरूरत है। रूसी विदेश उप मंत्री गेन्नादी गातिलोव ने ट्विटर पर लिखा कि सीरिया प्रस्ताव के मसौदा लेखक दुर्भाग्य से एक अतिरिक्त प्रयास नहीं करना चाहते न ही आम राय नहीं बनाना चाहते थे क्योंकि उन्हें परिणाम पता था।
इससे पहले चीन के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत ली बाओदोंग ने कहा कि विभिन्न पक्ष अब भी गंभीर रूप से बंटे हुए हैं। ऐसे में मतदान का कदम सुरक्षा परिषद के प्राधिकार या एकता को बनाए रखने में मदद नहीं करेगा।
इस बीच तुर्की की पुलिस ने इस्ताबुल में सीरिया के वाणिज्य दूतावास पर हमले को उतारू प्रदर्शनकारियों को तितर बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे।
करीब 300-400 सीरियाई एवं तुर्की प्रदर्शनकारी वाणिज्य दूतावास के समक्ष इकट्ठा हो गए और वे सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद के शासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वाणिज्य दूतावास पर इधर-उधर की वस्तुएं फेकने लगे।
जब उन्होंने मिशन में जबर्दस्ती घुसने का प्रयास किया तब वहा बड़ी संख्या में तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें वहा से खदेड़ दिया। इससे पहले इसी तरह के हमले एथेंस, बर्लिन, काहिरा, कुवैत, लंदन और कैनबरा में भी हुए हैं।
वहीं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पश्चिमी देशों द्वारा राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ पेश प्रस्ताव से नाराज सीरिया ने रविवार को जवाबी कार्रवाई की। उसने आतंकी संगठन अलकायदा के यूरोप प्रमुख अबु मुसाब अल सूरी को रिहा कर दिया।
अल सूरी को अमेरिकी कार्रवाई में मारे गए अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन का उत्तराधिकारी माना जाता है। सीरिया में दमनचक्र रविवार को भी जारी रहा। ताजा हिंसा में 47 और लोगों की मौत हो गई है। इस दमन से नाराज जनता ने असद शासन के खिलाफ सात देशों में सीरियाई दूतावास पर हमले किए हैं।
अल सूरी पर अमेरिका ने 47.5 लाख पौंड [करीब 37 करोड़ रुपये] का इनाम घोषित कर रखा है। टेलीग्राफ में प्रकाशित खबर के अनुसार, अल सूरी उर्फ मुस्तफा सेतमरियम नसर वर्ष 2005 में हुए लंदन विस्फोट का सूत्रधार है, जिसमें 52 लोग मारे गए थे। वह स्पेन के मैड्रिड में वर्ष 2004 में हुए ट्रेन विस्फोट का भी आरोपी है जिसमें 191 लोगों की मौत हुई थी। वर्ष 1995 में पेरिस मेट्रो ट्रेन में हुए हमले में भी उसी का हाथ था।
सुरक्षा परिषद में असद शासन के खिलाफ पेश प्रस्ताव पर चीन और रूस के वीटो और सीरिया में दमन जारी रहने से कई देशों में लोगों ने अपने गुस्से का इजहार किया। लंदन और आस्ट्रेलिया में जहां लोगों ने सीरियाई राजनयिकों के कार्यालय में तोड़फोड़ की वही मिस्र की राजधानी काइरो स्थित दूतावास में लोगों ने आग लगा दी।
जर्मनी में भी सीरियाई दूतावास में तोड़फोड़ की गई है। कुवैत में सीरिया विरोधी प्रदर्शनकारियों से सुरक्षाबलों की झड़प में सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए हैं।


