मध्यप्रदेश में बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं हैं 53 हजार स्कूल, 5 हजार में पीने का पानी तक नहीं

भले ही रमन सिंह 12 वर्षों से सत्ता की गद्दी में विराजमान हैं लेकिन सरकार छह साल बीत जाने के बाद भी शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) को राज्य में लागू नहीं कर पाई है। सरकार राज्य में आरटीई (नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009) की शर्तें पूरी नहीं कर पाई है। मध्यप्रदेश में आज भी 44 हजार 754 स्कूलों में खेल के लिए मैदान नहीं हैं। अलबत्ता ये स्थिति तब है जब राज्य सरकार ने स्कूलों में खेलों को अनिवार्य कर रखा है। देश में आरटीई कानून 2010 में लागू हुआ था।
स्कूलों में पानी तक नहीं
आरटीई को लागू कर पाने में मध्यप्रदेश सरकार की नाकामी का खुलासा सीएजी रिपोर्ट में हुआ है। इस रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 5 हजार 176 सरकारी स्कूलों में पानी की सुविधा तक नहीं है। बच्चों को पीने का पानी भी घर से लाना पड़ता है। पानी के बिना इन स्कूलों में शौचालय व्यवस्था पूरी तरह से ठप है।

इसलिए बच्चियां नहीं जातीं स्कूल
रिपोर्ट के मुताबिक सात हजार 180 स्कूलों में छात्रों और पांच हजार 945 स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय नहीं हैं। सीएजी की यह रिपोर्ट 30 नवंबर को विधानसभा में पेश हुई। राज्य में एक लाख 14 हजार 255 सरकारी प्राइमरी और मिडिल स्कूल हैं।

देश में एक अप्रैल 2010 से शिक्षा का अधिकार कानून लागू हुआ है। इसमें प्रावधान है कि कानून लागू होने के बाद तीन साल में सभी राज्यों को सभी मानकों को पूरा करना होगा। लेकिन राज्य सरकार अब तक कुछ विशेष प्रदर्शन नहीं कर पाई है। सीएजी ने प्रदेश में सरकारी स्कूलों की मौजूदा परिस्थितियों पर तीखी टिप्पणी की है।