मायावती के खिलाफ होने की वजह बताकर नाटक 'माई सैंडल' पर रोक

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drama जिला प्रशासन ने उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती पर लगने वाले राजनीतिक आरोपों से मेल खाते कथानक और पटकथा पर आधारित 'माई सैंडल' शीर्षक वाले नाटक के मंचन पर रोक लगा दी है। प्रशासन ने कहा कि आदर्श आचार संहिता के विपरीत है।

सत्यपथ रंगमंडल से जुडे़ डायरेक्टर मुकेश वर्मा ने बताया, 'जिला प्रशासन ने माई सैंडल नाटक के 28 जनवरी को राय उमानाथ बली सभागार में होने वाले मंचन को रोकने का निर्देश दिया है।'

नाटक का कथानक 500 साल पहले किसी मायागढ़ राज्य की राजकुमारी माया, उसके हीरे-जवाहरात खाने वाले हाथी और चाटुकार मंत्रियों-दरबारियों पर आधारित है। नाटक में बताया गया है कि चाटुकार दरबारी राजकुमारी के जन्मदिन पर उपहार देने के लिए अरब से एक सैंडल मंगाते है। सैंडल सरकारी खजाने में रखा जाता है, मगर माया का हाथी सोने, हीरे और जवाहरात के साथ उसे भी निगल जाता है। हीरे-जवाहरात खाने का आदी हाथी सैंडल निगल कर बीमार पड़ जाता है और तब चाटुकार दरबारी उसके इलाज के लिए डॉक्टर बुलाते हैं। डॉक्टर हाथी को दवा देता है हाथी लीद (गोबर) करता है, मगर उसमें सैंडल की बजाय तमाम गुप्त राज और दस्तावेज बाहर निकल आते हैं और मायागढ़ में बगावत हो जाती है।

मुकेश वर्मा ने कहा, 'हम वही सब लिखते और दिखाते है, जो आस-पास होता है, मगर माई सैंडल नाटक पूरी तरह काल्पनिक है और यह किसी व्यक्ति विशेष से कोई मेल नहीं खाता।'

जिलाधिकारी आनंद सागर ने बताया, 'माई सैंडल नाटक के मंचन पर रोक इसलिए लगाई गई है क्योंकि यह एक राजनीतिक दल के नेता के खिलाफ लगता है और ऐसे नाटक का मंचन आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है।'

डायरेक्टर ने कहा कि उन्हें अपना पक्ष रखने की अनुमति नहीं दी गई, लिहाजा उन्होंने जिला प्रशासन को लेटर लिखकर इस फैसले पर फिर से विचार करने और रोक लगाने से पहले नाटक को देख लेने का आग्रह किया है।

नाटक के डायरेक्टर मुकेश वर्मा ने कहा कि नाटक देखने के बाद अगर जिला प्रशासन नाटक के कुछ बदलाव करने के लिए कहता है तो वह इसके लिए भी तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वह जिला प्रशासन को नाटक के रिहर्सल की सीडी भी उपलब्ध कराने को तैयार हैं। उन्होंने बताया, 'यह नाटक तीन महीने पहले लिखा गया और 28 जनवरी को प्रस्तावित मंचन के लिए इसका रिहर्सल चल रहा था।'

मूलत: पत्रकार रहे मुकेश वर्मा इससे पहले सामाजिक मुद्दों पर व्यंग्य वाले 'अन्ना मेरा बाप' और 'सत्याग्रह' जैसे नाटक लिख चुके हैं।