भावांतर राशि भुगतान तथा उपार्जन की प्रक्रिया सुगम बनाने कलेक्टर ने दिए निर्देश

भावांतर भुगतान योजना में पंजीकृत किसानों के खातों में भावांतर राशि जमा करवाने की प्रक्रिया एवं मंडियों में उपार्जन कार्य की कलेक्टर श्रीमती भावना वालिम्बे ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में बैठक आयोजित कर समीक्षा की। समीक्षा के दौरान उन्होंने अधिकारियों को भावांतर राशि के भुगतान तथा मंडियों में खरीदी की प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित करने के संबंध में निर्देश दिए।
कलेक्टर श्रीमती वालिम्बे ने बैठक में भावांतर योजना के तहत पोर्टल पर प्रत्येक पंजीकृत एवं लाभान्वित किसानों द्वारा प्रेषित राजस्व संबंधी जानकारी का सत्यापन राजस्व अमले द्वारा करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने भावांतर भुगतान पोर्टल पर दर्ज किसानों के पंजीकृत बैंक खाता नम्बर, आईएफएस कोड तथा किसानों द्वारा नियत विक्रय अवधि में अधिसूचित फसल की कृषि उपज मंडी के भुगतान पत्रक अनुसार बिक्री की मात्रा एवं किसान के विक्रय दर की जानकारी को पोर्टल पर सही दर्ज किया जाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि जिले के पंजीकृत एवं लाभान्वित किसानों की सम्पूर्ण जानकारी हार्ड कॉपी में सुरक्षित रखी जाए। बैठक में उप संचालक कृषि श्री एनपी सुमन, जिला विपणन अधिकारी, उपायुक्त सहकारिता, प्रबंधक एग्रो सहित सभी संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
मंडियों तक उपज लाने दिया जाएगा परिवहन व्यय
मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना में किसानों को मंडियों तक अपनी उपज लाने के लिए परिवहन खर्च दिया जाएगा। इसके लिए प्रति किलोमीटर परिवहन खर्च जिला स्तरीय समिति निर्धारित करेगी तथा परिवहनकर्ता को भुगतान मंडी निधि से मंडी समिति द्वारा किया जाएगा। किसान खेत से 15 किलोमीटर या इससे अधिक दूरी पर स्थित कृषि उपज मंडी, उपमंडी तक फसल ले जाते हैं तो उसे प्रति किलोमीटर के आधार पर परिवहन व्यय दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना के पोर्टल पर राजस्व एवं कृषि उपज मंडी समिति द्वारा भरे गए डाटा के आधार पर निर्धारित विक्रय अवधि के मॉडल विक्रय दरों की गणना कर पोर्टल पर दर्ज पंजीकृत किसानों को भावांतर की कुल राशि किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा म.प्र. राज्य कृषि विपणन बोर्ड के खातों में राशि जमा कराई जायेगी। इस राशि को पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के क्रम में गणना अनुसार जिला-स्तर की कृषि उपज मंडी समितियो को भुगतान के लिये प्रदाय किया जायेगा।
किसान के बैंक खाते में होगा भावांतर राशि का भुगतान
जिला मुख्यालय की कृषि उपज मंडी समिति द्वारा भावांतर भुगतान योजना में भुगतान के लिये प्राप्त फण्ड को रखने हेतु राष्ट्रीयकृत बैंक में अलग खाता खोला जायेगा। इस खाते से किसानों के खाते में सीधे डिजिटल भुगतान किया जायेगा। जिला कलेक्टर इन सब तथ्यों की पुष्टि के लिये राजस्व और कृषि विभाग तथा कृषि उपज मंडी समिति के अमले का उपयोग कर सकेंगे। राष्ट्रीय सूचना केन्द्र के माध्यम से भुगतान के समय पंजीकृत एवं लाभान्वित किसानों को उनके बैंक खाते में कुल भुगतान की गई राशि की जानकारी पंजीयन के समय उपलब्ध करवाये गये मोबाइल फोन पर एसएमएस द्वारा प्रदाय किये जाने की व्यवस्था जिला कलेक्टर द्वारा 20 नवम्बर के पहले सुनिश्चित की जायेगी।
राशि की गणना तथा भुगतान के लिए जिला स्तरीय समिति
मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत 16 से 30 अक्टूबर 2017 की अवधि के लिये औसत मॉडल रेट घोषित किये गये हैं। इन औसत मॉडल दर के आधार पर योजना के प्रावधानों अनुसार भावांतर की गणना तथा भुगतान किए जाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिये जिला-स्तर पर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। समिति के अन्य सदस्यों में उप जिलाध्यक्ष स्तर का कलेक्टर द्वारा नामांकित अधिकारी, उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, म.प्र. राज्य सहकारी विपणन संघ के जिला विपणन अधिकारी, म.प्र. राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक, राष्ट्रीय सूचना केन्द्र के जिला सूचना अधिकारी, लीड बैंक अधिकारी को सदस्य और जिला मुख्यालय की मंडी के सचिव को समिति का सचिव बनाया गया है।
पोर्टल पर दर्ज जानकारी का होगा सत्यापन
गठित जिला स्तरीय समिति द्वारा पोर्टल पर दर्ज जानकारी का सात दिवस में सत्यापन कराया जाना सुनिश्चित किया जायेगा। सत्यापन की प्रक्रिया में यह ध्यान रखा जायेगा कि पोर्टल पर प्रत्येक पंजीकृत एवं लाभान्वित किसानों द्वारा प्रेषित राजस्व संबंधी जानकारी यथा- क्षेत्रफल, जिसमें अधिसूचित फसल की बोनी की गई है, का सत्यापन राजस्व अमले द्वारा कर लिया गया है। योजना के पोर्टल पर दर्ज किसानों द्वारा पंजीकृत बैंक खाते का क्रमांक एवं आईएफएस (IFS) कोड सही है। पंजीकृत एवं लाभान्वित होने वाले किसानों द्वारा नियत विक्रय अवधि में अधिसूचित फसल की कृषि उपज मंडी के भुगतान पत्रक अनुसार बिक्री की मात्रा एवं किसान के विक्रय दर की जानकारी का पोर्टल पर सही दर्ज किया गया है।
योजना के तहत निर्धारित की गई प्रक्रिया के अनुसार पंजीकृत किसान द्वारा योजना में चयनित फसल को निर्धारित पात्रता से अधिक मात्रा में एक से अधिक सौदों में बेचा गया है, तो उसके सौदों के परस्पर विक्रय दर में से न्यूनतम दरों के सौदों के आधार पर पात्रता की नियत सीमा तक की मात्रा को मान्य कर भावांतर की राशि की गणना की जायेगी। पंजीकृत कृषक का खेत जिस जिले में स्थित है उसके द्वारा यदि अन्य जिले की मंडी में चयनित कृषि उपज का विक्रय किया गया है, तो जिस जिले में पंजीकरण किया गया है उस जिले से भावांतर की राशि का भुगतान किया जायेगा।
लाभान्वित किसानों की जानकारी रखी जायेगी सुरक्षित
जिला स्तर की कृषि उपज मंडी समिति के कार्यालय द्वारा जिलों में पंजीकृत एवं लाभान्वित हितग्राहियों को भुगतान किये जाने के बाद पोर्टल पर जिले के पंजीकृत एवं लाभान्वित किसानों की सम्पूर्ण जानकारी हार्ड कॉपी में सुरक्षित रखी जायेगी। इसकी एक प्रति जिला कलेक्टर कार्यालय को समिति के सदस्यों के हस्ताक्षर सहित उपलब्ध करवाई जायेगी और एक प्रति मंडी बोर्ड को भेजी जायेगी। राष्ट्रीय सूचना केन्द्र द्वारा यह सुनिश्चित किया जायेगा कि पोर्टल पर जिला-स्तर पर जिन पंजीकृत एवं लाभान्वित किसानों को भुगतान की प्रक्रिया पूरी हो गयी है उनके पोर्टल पर दर्ज समस्त रिकार्ड फ्रीज किये जायें।
त्रुटि-सुधार के लिये कलेक्टर को दिया जा सकेगा अभ्यावेदन
पंजीकृत कृषक द्वारा भावांतर भुगतान की राशि उसके खाते में जमा होने के 15 दिवस में किसी प्रकार की त्रुटि के लिये जिला कलेक्टर को अभ्यावेदन प्रस्तुत किया जा सकेगा। जिला कलेक्टर स्तर पर अभ्यावेदन के प्राप्ति दिनांक से 10 दिवस में निराकरण कर अभ्यावेदक को संसूचित किया जायेगा। ऐसे समस्त पंजीकृत एवं लाभान्वित किसान जिनको 2,000 रुपये से अधिक की राशि जारी की गई है उनके प्रमाण-पत्र तैयार कर सार्वजनिक कार्यक्रम में वितरित किये जायेंगे ताकि योजना की पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। भुगतान की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर विवाद की स्थिति में योजना के प्रावधानों के अनुरूप एवं समय-समय पर जारी परिपत्रों की परिधि में रहते हुए भुगतान के संबंध में निर्णय लिये जाने के अधिकार जिला कलेक्टर को दिये गये हैं।