जिस पर 15 साल भरोसा किया, उसी ने अपने तीन साथियों के साथ मिलकर उद्योगपति के बेटे को अगवा कर लिया। वह जानता था कि उसके मालिक के पास कितनी रकम है, लिहाजा उसने बेटे के एवज में दस लाख रुपए फिरौती मांगी और रुपए लेकर बच्चे को छोड़ दिया। पुलिस ने बुधवार को अपहरण की इस गुत्थी को सुलझाने का दावा करते हुए उद्योगपति के सुरक्षा सुपरवाइजर सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से पुलिस ने फिरौती के छह लाख रुपए, एक मोबाइल फोन, कार और सोने के जेवर बरामद किए हैं।
सोमवार को अरेरा कॉलोनी निवासी उद्योगपति अवध गोयल के 14 वर्षीय बेटे वैभव का अपहरण 11 नंबर के पास से होने और फिरौती देकर छूटने की चर्चाएं मंगलवार को चलती रहीं। मंगलवार रात तक पुलिस अपहरण की किसी भी घटना से इनकार करती रही, लेकिन इसके बाद बुधवार रात करीब नौ बजे एसएसपी योगेश चौधरी ने प्रेसवार्ता लेकर इस गुत्थी को सुलझाने का दावा किया।
फोन कर 10 लाख मांगी थी फिरौती
पुलिस के अनुसार वैभव सोमवार शाम करीब सात बजे जिम से घर लौट रहा था। इसी दौरान 11 नंबर के पास एक सफेद कार से चार बदमाशों ने उसका अपहरण कर लिया। फिल्मी स्टाइल में हुई वारदात के बाद आरोपियों ने उसी के मोबाइल फोन से उद्योगपति के घर पर फोन लगाया और दस लाख रुपए की फिरौती की मांग की। पुलिस का दावा है कि फोन सुनते ही परिवार वाले डर गए और फिरौती के तौर पर छह लाख रुपए और कुछ सोने के जेवर अदा करने पर हामी भर दी। फिरौती की रकम देने के लिए उद्योगपति ने अपने ड्राइवर को बदमाशों के पास भेजा और रात करीब 12 बजे उसे लेकर घर पहुंचा।
ड्राइवर का नाम लिया और पकड़े गए
मामले की जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपियों ने फोन पर ड्राइवर के नाम का भी जिक्र किया था। साथ ही घर के लैंडलाइन नंबर पर फोन करना भी पुलिस को यह इशारा दे रहा था कि आरोपी कोई करीबी ही है। करीब 48 घंटे चली तहकीकात में पुलिस ने दो दर्जन से ज्यादा संदेहियों से पूछताछ की और आखिर में उद्योगपति के संस्थान में 15 साल से बतौर सुरक्षा सुपरवाइजर काम करने वाले मनीष चौरसिया को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने अपने तीन अन्य साथियों प्रमोद कुमार, राकेश चौधरी और भूरा उर्फ प्रदीप के साथ वारदात को अंजाम देना कुबूल कर लिया।
घंटों शहर में ही दौड़ाते रहे कार
उद्योगपति के बेटे के अपहरण के बाद बदमाश कार में ही उसे घंटों घुमाते रहे। एसएसपी योगेश चौधरी का दावा है कि फिरौती की रकम मिलने तक बदमाशों की कार शहर में ही दौड़ती रही। इस दौरान वे लिंक रोड होते हुए शहर के सीमावर्ती इलाकों में भी घूमे। कार में ही बदमाशों ने कक्षा दसवीं के छात्र वैभव के फोन का इस्तेमाल किया और फिरौती मांगी। इसके बाद भी वे रुके नहीं और चार घंटे बाद अयोध्या बायपास के पास रकम लेकर उसे ड्राइवर के हवाले कर फरार हो गए। घर लौटे किशोर ने पुलिस को बताया कि बदमाश आपस में बात करने के लिए दिल्ली की तरफ बोले जाने वाली भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे। हालांकि उनकी बोलचाल बनावटी लग रही थी। एसएसपी के मुताबिक इस दौरान मुख्य आरोपी ने ज्यादा बातचीत नहीं की।
कब, क्या हुआ
- सोमवार शाम 7 बजे हुआ अपहरण।
- शाम करीब 8 बजे थाने पर अपहरण की सूचना का एक गुमनाम फोन आया।
- फोन आते ही पुलिस ने इलाके की नाकेबंदी कर दी।
- रात 10 बजे परिजन ने गुमशुदगी के बारे में पुलिस को सूचना दी।
- देर रात 1 बजे पुलिस को फोन के जरिए दी छात्र के मिलने की सूचना।
- मंगलवार रात 11 बजे परिजनों ने बदमाशों को फिरौती की रकम अदा करने की बात पुलिस को बताई।


