दुनिया के सबसे बड़े और शानदार पेड़ों का भविष्य खतरे में है। इसकी वजह वनों की कटाई, कीटों के आक्रमण और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव हैं।
जेम्स कुक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विलियम लौरेंस ने चेताया है कि बड़े पेड़ों के खत्म हो जाने से जैव विविधता और वन पारिस्थितिकी पर खासा प्रभाव पड़ेगा और जलवायु परिवर्तन की स्थिति और अधिक बिगड़ जाएगी।
दुनिया भर के जंगलों के अनुसंधान की समीक्षा के आधार पर लौरेंस ने 'न्यू साइंटिस्ट' मैगजीन में लिखा कि बड़े पेड़ों को एक सुरक्षित जगह और लम्बे समय तक स्थिरता की आवश्यकता है। लेकिन समय और स्थिरता हमारी आधुनिक दुनिया के लिए दुर्लभ चीजें बन गई हैं।
विशालकाय पेड़ वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण आवास और आहार की पेशकश भी करते हैं। इसके साथ-साथ इनकी पत्तियों से बड़ी मात्रा में वाष्प बनकर उड़ने वाला पानी स्थानीय वर्षा में भी योगदान देता है।
पुराने पेड़ में भारी मात्रा में कार्बन भी होता है। लेकिन उनके पृथ्क कार्बन और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं प्रदान करने की क्षमता को मानवीय गतिविधियों से खतरा है। दुनिया के कई विशालकाय पेड़ों को लकड़हारों ने अपना निशाना बनाया है। विश्वविद्यालय के बयान के अनुसार, ''सभी वृक्षों में पुराने पेड़ सबसे अधिक मूल्यवान होते हैं और इसी वजह से इन्हें सबसे पहले काटा जाता है।''


