संभोग शक्ति बढ़ाना : वाजीकरण

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Kamasutra-kamshaktiयौनसुख अर्थात संभोग क्रिया के समय चरम सुख की प्राप्ति होना बहुत ही आनंददायक होता है। इसकी तुलना बहुत से विद्वानों ने स्वर्ग के सुख से की है। हर मनुष्य पूरे जीवन इस सुख को भोगना चाहता है। मनुष्य कभी भी काम अर्थात सेक्स से मुक्त नहीं होना चाहता। यही उसके जीवन का प्राथमिक बिंदु है। काम अर्थात सेक्स की शक्ति परमात्मा की शक्ति है इसलिए तो काम अर्थात सेक्स से शरीर में ऊर्जा पैदा होती है इसलिए मनुष्य को पूरी तरह से काम-शक्ति संपन्न होना चाहिए।

          लेकिन आज के आधुनिक युग में युवा पीढ़ी पर काम का बोझ, एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़, मानसिक तनाव, विषाद, नशे की लत, पश्चिमी सभ्यता को अपनाने की लालसा, अप्राकृतिक मैथुन, एलोपैथिक दवाईयों के दुष्परिणाम, खान-पान में अनिमियता बरतना, दूषित वातावरण और बढ़ती हुई कामवासना के कारण उम्र से पहले ही यौनशक्ति की कमी से पीड़ित होते जा रहे हैं। कामशक्ति की कमी से ग्रस्त युवकों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है।

वाजीकरण क्या है-  सेक्स और वीर्य का आपस में बहुत ही गहरा संबंध है। हर युवक चाहता है कि स्त्री के साथ संभोग करते समय वीर्यस्खलन देर से हो। इसके लिए व्यक्ति हमेशा ही नई-नई चीजें ढूंढता रहता है। अपनी यौनशक्ति को बढ़ाने के लिए मनुष्य हर समय कोशिश करता रहता है इसके साथ ही वह अपनी संभोग शक्ति बढ़ाने के लिए भी प्रयत्नशील रहता है। पुरुष के मन में हमेशा यह इच्छा रहती है कि वह सदा जवान रहे और वह स्त्री के साथ पूरे जोश के साथ सेक्स करता रहूं। प्रौढ़ावस्था की ओर बढ़ता पुरुष भी हमेशा संभोगशक्ति बढ़ाने वाले उपाय तलाशता रहता है।

          बहुत से लोगों की यह धारणा बनी हुई है कि एक वीर्यवान पुरुष ही स्त्री को संभोग क्रिया के समय पूरी तरह से चरमसुख तक पहुंचा सकता है। संभोगशक्ति को बढ़ाने के लिए वीर्य को शुद्ध, गाढ़ा, और शुक्राणुओं की वृद्धि, स्तंभन शक्ति बढ़ाने के लिए आयुर्वेद के विद्वानों ने वाजीकरण नाम के अलग विभाग की रचना की है। उनके हिसाब से वीर्य को बढ़ाने के लिए, वीर्य से संबंधित दोषों को दूर करने के लिए, संभोग शक्ति और स्तंभन शक्ति बढ़ाने के लिए वाजीकरण औषधि का सेवन करना बहुत जरूरी है। वाजीकरण को वृष्य भी कहते हैं। इसलिए मनुष्य के शरीर में जिन खाद्य पदार्थों, यौगिक क्रियाओं या औषधियों के द्वारा शक्ति प्राप्त होती है उसे वाजीकरण के नाम से जाना जाता है।

वाजीकरण की जरूरत- दुनिया में हर स्त्री और पुरुष सेक्स के लिए बराबर रूप से समर्थ नहीं होते हैं और हर कोई संतान पैदा करने में सक्षम नहीं हो पाते हैं। जैसे कि बहुत से पुरुष शरीर से तो बहुत ही हष्ट-पुष्ट और ताकतवर होते हैं लेकिन फिर भी वह संभोगशक्ति में कमजोर होते हैं। इन्हीं के विपरीत बहुत से पुरुष दुबले-पतले शरीर वाले होते हुए भी बहुत तेज संभोग शक्ति वाले और स्त्री को संतुष्ट करने वाले होते हैं। बहुत से पुरुष स्वभाव से ही सेक्स करने में कमजोर होते हैं और इस क्रिया में कुछ ही देर में थक जाते हैं। लेकिन बहुत से पुरुष संभोग शक्ति को ज्यादा लंबे समय तक ले जाने वाले होते हैं। कुछ पुरुष वाजीकरण औषधियों के सेवन से संभोग क्रिया में सफल होते हैं तो कुछ इस क्रिया का बार-बार अभ्यास करने से इस क्रिया को सफल बनाते हैं। बहुत से पुरुष कम वीर्य वाले होते हैं तो कुछ संभोग क्रिया के समय देर से उत्तेजित होने वाले होते हैं। ऐसे पुरुषों में काम-उत्तेजना सोई हुई अवस्था में होती है जिसे स्त्री के नग्न शरीर के अंगों को देखकर, चुंबन, आलिंगन, सेक्स के बारे में बातचीत और नग्न तसवीर आदि के द्वारा जागृत किया जाता है। ऐसे पुरुषों को संभोग क्रिया में तुरंत उत्तेजित करने के लिए वाजीकरण औषधियों का सेवन कराना जरूरी होता है।

वाजीकरण का सेवन करने के लिए जरूरी बातें-

          आयुर्वेद में बताया गया है कि कम उम्र के बच्चों और ज्यादा उम्र के पुरुषों को वाजीकरण औषधि का सेवन नहीं करना चाहिए। इनका सेवन लगभग 16 से 50 साल तक की उम्र के लोगों को करना चाहिए। क्योंकि यही उम्र सेक्स करने के लिए सबसे ज्यादा अच्छा होता है। 16 साल से कम उम्र में या 50 साल से ज्यादा की उम्र में सेक्स करना बेकार होता है क्योंकि बाल्यकाल (युवावस्था से पहले की उम्र) में शरीर की धातुएं (वीर्य, शुक्राणु) पूरी तरह से विकसित नहीं होते हैं और अगर ऐसे में वह स्त्री के साथ संभोग क्रिया करता है तो वह उसके लिए व्यर्थ ही होता है और कभी-कभी हानिकारक भी हो जाता है।

          इसी तरह से 50 साल की उम्र अर्थात वृद्धावस्था में शरीर की सारी धातुएं (वीर्य, शुक्राणु) कमजोर हो जाती हैं। कमजोर शरीर वाला, कमजोर हड्डियों वाला व्यक्ति अगर किसी स्त्री के साथ संभोग करने में लग जाता है तो वह इसमें कुछ पाने के बजाय अपने शरीर का नाश करवा लेता है। रसायन औषधि के सेवन से जहां नए यौवन की प्राप्ति होती है वही वाजीकरण औषधियों के सेवन से यौनसुख मिलता है। जिस व्यक्ति का मन उसके वश में रहता है वह हमेशा वाजीकरण औषधि का सेवन कर सकता है।

वाजीकरण द्रव्य-

दूध-  आयुर्वेद के अनुसार दूध को सबसे ज्यादा उपयोगी वाजीकरण औषधि का नाम दिया गया है। दूध वीर्य की वृद्धि करने वाला, काम-शक्ति को बढ़ाने वाला और शरीर की खोई हुई ताकत को दुबारा पैदा करने में प्रभावशाली होता है। अगर स्त्री के साथ संभोग करने से पहले गर्म दूध पी लिया जाए तो इससे यौनशक्ति बढ़ती है, संभोग के प्रति मन में इच्छा पैदा होती है, पूरी मात्रा में वीर्य स्खलन होता है। वहीं अगर संभोग करने के बाद गर्म और मीठा दूध पीने से संभोग करने के समय खर्च हुई शक्ति दुबारा मिलकर व्यक्ति की थकान दूर हो जाती है। इसलिए संभोग करने के पहले और बाद में हमेशा दूध पीना चाहिए।

उड़द- उड़द के लड्डू, उड़द की दाल, दूध में बनाई हुई उड़द की खीर का सेवन करने से वीर्य की बढ़ोतरी होती है और संभोग शक्ति बढ़ती है।

अंडा-  अंडे के अंदर वीर्य को बढ़ाने की बहुत ज्यादा क्षमता होती है। दूध के अंदर अंडे की जर्दी मिलाकर पीने से वीर्य बढ़ता है और संभोग करने की शक्ति भी तेज होती है। वैसे तो ज्यादातर लोग मुर्गी और मोरनी के अंडों का सेवन करते ही हैं लेकिन इनके अलावा चिड़िया के अंडों को भी बहुत ज्यादा वाजीकरण औषधि के रूप में गिना जाता है।

तालमखाना- तालमखाना ज्यादातर धान के खेतों में पाया जाता है इसे लेटिन भाषा में एस्टरकैन्था-लोंगिफोलिया कहते हैं। वीर्य के पतले होने पर, शीघ्रपतन रोग में, स्वप्नदोष होने पर, शुक्राणुओं की कमी होने पर रोजाना सुबह और शाम लगभग 3-3 ग्राम तालमखाना के बीज दूध के साथ लेने से लाभ होता है। इससे वीर्य गाढ़ा हो जाता है।

गोखरू-  गोखरू का फल कांटेदार होता है और औषधि के रूप में काम आता है। बारिश के मौसम में यह हर जगह पर पाया जाता है। नपुंसकता रोग में गोखरू के लगभग 10 ग्राम बीजों के चूर्ण में इतने ही काले तिल मिलाकर 250 ग्राम दूध में डालकर आग पर पका लें। पकने पर इसके खीर की तरह गाढ़ा हो जाने पर इसमें 25 ग्राम मिश्री का चूर्ण मिलाकर सेवन करना चाहिए। इसका सेवन नियमित रूप से करने से नपुसंकता रोग में बहुत ही लाभ होता है।

इसके अलावा गोखरू का चूर्ण, आंवले का चूर्ण, नीम और गिलोय को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें। इस बने हुए चूर्ण को रसायन चूर्ण कहा जाता है। इस चूर्ण को रोजाना 3 बार 1-1 चम्मच की मात्रा में दूध या ताजे पानी के साथ लेने से नपुंसकता, संभोग करने की इच्छा न करना, वीर्य की कमी होना, प्रमेह, प्रदर और मूत्रकृच्छ जैसे रोगों में लाभ होता है।

मूसली- मूसली पूरे भारत में पाई जाती है। यह सफेद और काली दो प्रकार की होती है। काली मूसली से ज्यादा गुणकारी सफेद मूसली होती है। यह वीर्य को गाढ़ा करने वाली होती है।

          मूसली के चूर्ण को लगभग 3-3 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम दूध के साथ लेने से वीर्य की बढ़ोत्तरी होती है और शरीर में काम-उत्तेजना की वृद्धि होती है।

          इसके अलावा मूसली के लगभग 10 ग्राम चूर्ण को 250 ग्राम गाय के दूध में मिलाकर अच्छी तरह से उबालकर किसी मिट्टी के बर्तन में रख दें। इस दूध में रोजाना सुबह और शाम पिसी हुई मिश्री मिलाकर सेवन करने से लिंग का ढीलापन, शीघ्रपतन और संभोग क्रिया की इच्छा न करना, वीर्य की कमी होना आदि रोगों में बहुत लाभ मिलता है।

कौंच-  कौंच को कपिकच्छू और कैवांच आदि के नामों से भी जाना जाता है। संभोग करने की शक्ति को बढ़ाने के लिए इसके बीज बहुत लाभकारी रहते हैं। इसके बीजों का सेवन करने से वीर्य की बढ़ोत्तरी होती है, संभोग करने की इच्छा तेज होती है और शीघ्रपतन रोग में लाभ होता है। इसके बीजों का उपयोग करने के लिए बीजों को दूध या पानी में उबालकर उनके ऊपर का छिलका हटा देना चाहिए। इसके बाद बीजों को सुखाकर बारीक चूर्ण बना लेना चाहिए। इस चूर्ण को लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम मिश्री के साथ दूध में मिलाकर सेवन करने से लिंग का ढीलापन और शीघ्रपतन का रोग दूर होता है।

          कौंच के बीज, सफेद मूसली और अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण तैयार कर लें। इस चूर्ण में से एक चम्मच चूर्ण सुबह और शाम दूध के साथ लेने से लिंग का ढीलापन, शीघ्रपतन और वीर्य की कमी होना जैसे रोग जल्दी दूर हो जाते हैं।

सेमल- सेमल के पेड़ पूरे भारतवर्ष में पाए जाते हैं। इसको लेटिन भाषा में सालमालिया-माला-बारिका कहा जाता है। सेमल के गोंद को मोचरस कहा जाता है। यौनरोग होने पर सेमल की गोंद और जड़ का प्रयोग होता था।

          लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में सेमल की जड़ के चूर्ण और मूसली के चूर्ण को रोजाना सुबह और शाम मीठे दूध के साथ सेवन करने से वीर्य की बढ़ोत्तरी होकर संभोग करने की शक्ति तेज होती है। स्वप्नदोष और शीघ्रपतन रोग से ग्रस्त रोगियों को सेमल की गोंद में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर लगभग 6-6 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम दूध और पानी के साथ सेवन करना चाहिए।

शतावरी- शतावरी को लेटिन भाषा में असपारगस-रेसेमेसस कहा जाता है। इसका पौधा उत्तर भारत में ज्यादा पाया जाता है। इसकी जड़ को औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है। शरीर में बल और वीर्य को बढ़ाने के लिए शतावरी की जड़ का चूर्ण लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम गर्म दूध के साथ लेना लाभकारी रहता है। इसे दूध में चाय की तरह पकाकर भी सेवन किया जा सकता है। यह औषधि स्त्रियों के स्तनों को बढ़ाने में लाभकारी रहती है। शतावरी के ताजे रस को 10 ग्राम की मात्रा में लेने से कुछ ही समय में वीर्य बढ़ता है।

विदारीकंद- विदारीकंद की बेल पूरे भारत में खासकर हिमालय की निचली पहाड़ियों, बंगाल, पंजाब, असम आदि स्थानों पर मिलती है। इसको लेटिन भाषा में Pueraria-Tuberosa कहा जाता है। विदारीकंद के चूर्ण को 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम असमान मात्रा के घी और शहद के साथ मिलाकर चाटने और ऊपर से गर्म दूध पीने से पुरुष की काम-शक्ति तेज हो जाती है। विदारीकंद बल और वीर्य बढ़ाने वाली औषधि है। इसके अलावा विदारीकंद के चूर्ण में इसी का ताजा रस मिलाकर लगभग 21 बार घोटें व डिब्बे में सुरक्षित रखें। इसमें से 5-5 ग्राम की मात्रा लेकर दिए गए तरीके से ही दूध के साथ सेवन करने से पुरुष का वीर्य बढ़ता है।

असगंध- असगंध को हिंदी भाषा में अश्वगंधा और लेटिन भाषा में Withania-Somnifera कहा जाता है। यह भारत में हर जगह पाई जाती है। राजस्थान के नागौर जिले में पाई जाने वाली असगंध, नागौरी असगंध के नाम से जानी जाती है। इसकी जड़ को औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है। अश्वगंधा का सेवन करने से शरीर में घोड़े की तरह संभोग करने की ताकत आ जाती है और इसके पौधे के अंदर से घोड़े की तरह गंध आती है इसलिए इसका नाम अश्वगंधा पड़ा है।

          अश्वगंधा की जड़ के 3-3 ग्राम चूर्ण को दूध के साथ सेवन करने से शारीरिक शक्ति और संभोग करने की शक्ति तेज होती है। वीर्य की कमी होना, धातु की कमजोरी, उत्तेजना की कमी होना, मानसिक कमजोरी आदि रोगों में अश्वगंधा का सेवन करना लाभकारी होता है। जब शरीर में वीर्य की कमी होने लग जाती है तो इसके कारण याददाश्त कम होने लगती है, किसी काम में मन नहीं लगता है, शरीर में हर समय थकान सी बनी रहती है, स्त्री के साथ संभोग करने का मन नहीं करता, लिंग पूरी तरह से उत्तेजित नहीं हो पाता। इस तरह के लक्षणों में अश्वगंधा के चूर्ण को गाय के घी में मिलाकर चाटने और उसके ऊपर से गाय का गर्म-गर्म दूध पीना लाभकारी रहता है।

कुछ आसान वाजीकरण (संभोग शक्ति बढ़ाने वाले) योग-

    * शतावरी, गोखरू, तालमखाना, कौंच के बीज, अतिबला और नागबला को एकसाथ मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ रोजाना सेवन करने से स्तंभन शक्ति तेज होती है और शीघ्रपतन के रोग में लाभ होता है। रात को संभोग क्रिया करने से 1 घंटा पहले इस चूर्ण को गुनगुने दूध के साथ सेवन करने से संभोग क्रिया सफलतापूर्वक संपन्न होती है। वीर्य का पतला होना, यौन-दुर्बलता और विवाह के बाद शीघ्रपतन होना जैसे रोगों में इसका सेवन बहुत लाभकारी रहता है।
    * मोचरस, कौंच के बीज, शतावरी, तालमखाना को 100-100 ग्राम की मात्रा में लेकर लगभग 400 ग्राम मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम दूध के साथ सेवन करने से बुढ़ापे में भी संभोग क्रिया का पूरा मजा लिया जा सकता है। इस योग को लगभग 2-3 महीने तक सेवन करना लाभकारी रहता है।
    * लगभग 6 चम्मच अदरक का रस, 8 चम्मच सफेद प्याज का रस, 2 चम्मच देशी घी और 4 चम्मच शहद को एक साथ मिलाकर किसी साफ कांच के बर्तन में रख लें। इस योग को रोजाना 4 चम्मच की मात्रा में सुबह खाली पेट सेवन करना चाहिए। इसको लगातार 2 महीने तक सेवन करने से स्नायविक दुर्बलता, शिथिलता, लिंग का ढीलापन, कमजोरी आदि दूर हो जाते हैं।
    * बबूल की कच्ची पत्तियां, कच्ची फलियां और गोंद को बराबर मात्रा में मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें और इनमें इतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर किसी डिब्बे आदि में रख लें। इस चूर्ण को नियमित रूप से 2 महीने तक 2-2 चम्मच की मात्रा में दूध के साथ सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है और स्तंभन शक्ति बढ़ती है। इसके अलावा यह योग शीघ्रपतन और स्वप्नदोष जैसै रोगों में बहुत लाभकारी रहता है।
    * सफेद मूसली के चूर्ण और मुलहठी के चूर्ण को बराबर की मात्रा में मिला लें। इस चूर्ण को 1 चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम शुद्ध घी के साथ मिलाकर चाट लें और ऊपर से गर्म दूध पी लें। इस योग को नियमित सेवन करने से धातु वृद्धि होती है, नपुंसकता दूर होती है और शरीर पुष्ट और शक्तिशाली बनता है।
    * 10-10 ग्राम धाय के फूल, नागबला, शतावरी, तुलसी के बीज, आंवला, तालमखाना और बोलबीज, 5-5 ग्राम अश्वगंध, जायफल और रूदन्तीफल, 20-20 ग्राम सफेद मूसली, कौंच के बीज और त्रिफला तथा 15-15 ग्राम त्रिकटु, गोखरू को एक साथ जौकुट करके चूर्ण बना लें। इसके बाद इस मिश्रण के चूर्ण को लगभग 16 गुना पानी में मिलाकर उबालने के लिए रख दें। उबलने पर जब पानी जल जाए तो इसमें 10 ग्राम भांगरे का रस मिलाकर दुबारा से उबाल लें। जब यह पानी गाढ़ा सा हो जाए तो इसे उतारकर ठंडा करके कपड़े से अच्छी तरह मसलकर छान लें और सुखाकर तथा पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में 20 ग्राम शोधी हुई शिलाजीत, 1 ग्राम बसन्तकुसूमाकर रस और 5 ग्राम स्वर्ण बंग को मिला लें। इस औषधि को आधा ग्राम की मात्रा में शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम चाटकर ऊपर से गर्म दूध पी लें। इस औषधि को सेवन करने से पुरुषों के शरीर में बल और वीर्य की बढ़ोत्तरी होती है और वह संभोगक्रिया को लंबे समय तक चला सकता है। इस औषधि के सेवन काल के दौरान खटाई, तेज मिर्च-मसाले वाले और तले हुए भोजन का सेवन करना चाहिए।
    * मुलहठी के बारीक चूर्ण को 10 ग्राम की मात्रा में घी और शहद से साथ चाटकर ऊपर से दूध पीने से संभोग शक्ति बहुत तेज होती है।
    * सर्दी के मौसम में उड़द की दाल के लड्ड़ू बनाकर रोजाना सुबह के समय खाकर ऊपर से दूध पीने से शरीर में बल और वीर्य की वृद्धि होती है।
    * लगभग 20 ग्राम उड़द की दाल के छिलके उतारकर रात के समय पानी में भिगों दें। सुबह इस दाल को बारीक पीसकर पिट्ठी बना लें और कड़ाही में डालकर घी के साथ गुलाबी होने तक सेक लें। इसके बाद एक दूसरे बर्तन में 250 ग्राम दूध डालकर उबाल लें। दूध के उबलने पर इसमें सिंकी हुई उड़द की दाल डालकर पका लें। पकने पर इसमें शक्कर डालकर नीचे उतार लें। इस खीर को ठंडा करके रोजाना सुबह नाश्ते के समय 2 चम्मच शहद के साथ सेवन करने से पुरुष की संभोग शक्ति बहुत ज्यादा तेज हो जाती है।
    * लगभग 250 ग्राम शतावरी घृत में इतनी ही मात्रा में शक्कर, 5 ग्राम छोटी पीपल और 5 चम्मच शहद मिला लें। इस मिश्रण को 1-1 चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम दूध के साथ सेवन करने से संभोग करने की शक्ति तेज हो जाती है।
    * कौंच के बीज, उड़द, गेंहू, चावल, शक्कर, तालमखाना और विदारीकंद को बराबर मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में दूध मिलाकर आटे की तरह गूंथ लें। इसके बाद इसकी छोटी-छोटी पूड़ियां बनाकर गाय के घी में तल लें। इन पूड़ियों को खाकर ऊपर से दूध पीने से वीर्य की बढ़ोतरी होती है और संभोग करने की शक्ति तेज होती है। दिए गए द्रव्यों के देशी घी में लड़डू बनाकर सेवन करना भी बहुत लाभकारी रहता है।
    * जानकारी- उड़द की दाल और कौंच के बीजों को प्रयोग में लाने से पहले उन्हें गर्म पानी या दूध में उबालकर उनके छिलके उतार लेने चाहिए।
    * दही की मलाई में उतनी ही मात्रा में वंशलोचन, कालीमिर्च, शक्कर, शहद और काली मिर्च मिला लें। इसके बाद एक मिट्टी के घड़े के मुंह पर साफ कपड़ा बांध देना चाहिए तथा उस कपड़े से दिए गए मिश्रण को छान लें। इससे मिश्रण छनकर उस घड़े के अंदर जमा हो जाएगा। इस छने हुए मिश्रण को रोजाना 2-2 चम्मच की मात्रा में घी के साथ सेवन करके ऊपर से दूध पीने से पुरुष के शरीर में ताकत आती है और संभोग शक्ति तेज होती है।
    * 30 पीस छोटी पीपल को लगभग 40 ग्राम तिल के तेल या गाय के घी में भूनकर बिल्कुल पाउडर बना लें। फिर उसमें शहद और शक्कर मिलाकर दूध निकालने के बर्तन में डालकर उसी के अंदर गाय का दूध दूह लें। इस दूध को अपनी रुचि के अनुसार सेवन करें। इसको 1-1 चम्मच की मात्रा में गाय के ताजा निकले हुए दूध के साथ सेवन करने से बल और वीर्य की वृद्धि होती है।
    * 100-100 ग्राम शतावरी, कौंच के बीज, उड़द, खजूर, मुनक्का दाख और सिंघाड़ा को मोटा-मोटा पीसकर चूर्ण बना लें। इसके बाद 1 लीटर दूध में इतनी ही मात्रा में पानी मिलाकर इसमें चूर्ण को भी मिला लें और हल्की आग पर पकाने के लिए रख दें। पकने पर जब सिर्फ दूध बच जाए तो नीचे उतारकर छान लें। फिर इसमें लगभग 300-300 ग्राम चीनी, वंशलोचन का बारीक चूर्ण और घी मिला लें। इसके बाद इसमें शहद मिलाकर 50 ग्राम की मात्रा में रोजाना सुबह और शाम सेवन करने से बल और वीर्य बढ़ता है।
    * लगभग 25 ग्राम खस-खस के दाने, 25 ग्राम भुने चने, 25 ग्राम खांड और नारियल की पूरी गिरी को एक साथ कूटकर पीसकर रख लें। इस चूर्ण को रोजाना 70 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से शरीर में वीर्य और ताकत की बढ़ोत्तरी होती है।
    * लौंग, अकरकरा, कबाबचीनी, ऊदस्वालिस और बीजबंद को बराबर की मात्रा में लेकर कूटकर और पीसकर छान लें। इसके बाद इस चूर्ण के वजन से 2 गुणा पुराना गुड़ लेकर लेकर इसमें मिला लें और छोटी-छोटी गोलियां बना लें। यह 1-1 गोली रोजाना सुबह और शाम दूध के साथ 21 दिनों तक लेने से शरीर में बल और वीर्य की वृद्धि होती है और संभोग करने की शक्ति तेज होती है।
    * 25 ग्राम पिसी-छनी हुई मुलहठी, 25 ग्राम पिसी और छनी असगंध, और 12 ग्राम पिसा और छना हुआ बिधारा को एकसाथ मिलाकर शीशी में भर लें। सर्दी के मौसम में इसमें से 3 ग्राम चूर्ण को अच्छी तरह से घुटे हुए लगभग 0.12 ग्राम मकरध्वज के साथ मिला लें। इसके बाद इसे मिश्री मिले दूध के साथ रोजाना सुबह और शाम 3-4 महीनों तक सेवन करने से संभोग शक्ति तेज होती है।
    * लगभग 25-25 ग्राम सफेद बूरा, ढाक की छाल का रस, गेंहू का मैदा और शुद्ध घी को एकसाथ मिलाकर हलवा बना लें। इस हलुए को रोजाना सुबह और शाम सेवन करने से शरीर मजबूत बनता है, धातु पुष्ट होती है और संभोग करते समय चरम सुख की प्राप्ति होती है।
    * 10 ग्राम भैंस का घी और 10 ग्राम सितोपलादि चूर्ण को किसी कांच या मिट्टी के बर्तन में भरकर रख लें। फिर उसी बर्तन में गाय या भैंस का दूह लें तथा उस दूध को पी लें। रोजाना सुबह और शाम 3-4 महीनों तक इस दूध का सेवन करने से हर प्रकार की कमजोरी दूर हो जाती है, धातु पुष्ट हो जाता है, बल-वीर्य की बढ़ोतरी होती है, स्तंभन शक्ति बढ़ती है और संभोग शक्ति में रुचि उत्पन्न होती है।
    * सफेद चीनी, ग्वारपाठे का गूदा, घी और गेंहू के मैदा को बराबर मात्रा में एकसाथ मिलाकर हलवा बनाकर खाने से 21 दिन में ही पुरुष की नपुंसकता दूर हो जाती है।
    * 25-25 ग्राम केसर, पीपल, जायफल, जावित्री, अकरकरा, सोंठ, लोंग और लाल चंदन, 6 ग्राम शुद्ध हिंगुल, 6 ग्राम शुद्ध गंधक और 90 ग्राम अफीम को ले लें। इन सारी औषधियों को कूटकर और छानकर लगभग 20-20 ग्राम की मात्रा में रख लें। फिर सबको एकसाथ मिलाकर हिंगुल, गंधक और अफीम के साथ खरल में डालकर पानी मिलाकर घोट लें। इसके पूरी तरह से घुट जाने पर 0.36 ग्राम और 0.36 ग्राम की गोलियां बना लें। यह एक गोली रोजाना सोने से पहले खाकर ऊपर से दूध पीने से संभोग करने की शक्ति तेज होती है और स्तंभन शक्ति बढ़ती है।
    * सूखे बिदारीकंद को पीसकर उसमें ताजी बिदारीकंद के रस की 7 भावनाएं देकर उसमें मिश्री तथा शहद मिलाकर लगभग 20 ग्राम की मात्रा में नियमित रूप से 3 महीने तक सुबह के समय सेवन करने से बूढ़े लोग भी अपने शरीर में जवानों जैसी ताकत महसूस करते हैं।
    * कुलंजन, सोंठ, मिश्री, अंजीर के बीज, गाजर के बीज, जरजीह के बीज और टिलयुन के बीजों को बराबर मात्रा में मिलाकर कूटकर और पीसकर छान लें। इसके बाद शहद और सफेद प्याज के पत्तों के रस को एक साथ मिलाकर किसी कलईदार बर्तन में भरकर हल्की आग पर पकाने के लिए रख दें। जब प्याज का रस जल जाए और सिर्फ शहद ही बाकी रह जाए तो इसमें पहले बताई गई औषधियों का तैयार किया हुआ चूर्ण मिला लें। इस मिश्रण को अपनी ताकत के अनुसार सेवन करने से संभोग करने की शक्ति और संभोग करने में रुचि बढ़ती है।
    * लगभग 10-10 ग्राम जायफल, काला अनार, रुमी मस्तंगी, खस की जड़, बालछड़, दालचीनी, बबूल और शहद, 1 ग्राम कस्तूरी, 9 ग्राम सालममिश्री और 125 ग्राम मिश्री को एक साथ मिलाकर पीसकर छान लें। इस चूर्ण को 6 ग्राम की मात्रा में रोजाना सुबह और शाम 3-4 महीने तक सेवन करने से संभोग करने की शक्ति तेज हो जाती है।
    * सूखे आंवलों को अच्छी तरह से कूटकर और पीसकर छान लें। इस चूर्ण में ताजे आंवलों के ताजा रस को उबालकर और सुखाकर किसी कांच की शीशी में भर लें। इस मिश्रण में शहद और मिश्री मिलाकर अपनी ताकत के अनुसार 3 महीने तक खाने से बूढ़े लोगों के शरीर में भी जवानों के जैसी संभोग करने की ताकत आ जाती है।
    * तालमखाना, समुंद्रशोष, ढाक का गोंद, बीजबंद, बड़े गोखरू, तज और सफेद मूसली को एक साथ मिलाकर कूटकर और पीसकर छान लें। इसके बाद इस चूर्ण के बराबर ही इसमें पिसी हुई मिश्री मिलाकर रख लें। इस चूर्ण को रोजाना सुबह 6 ग्राम की मात्रा में फांककर उसके ऊपर से गाय का धार वाला ताजा दूध पीने से शरीर में ताकत और वीर्य की बढ़ोतरी होती है।

लाभकारी शास्त्रीय वाजीकर योग-

पुष्पधंवा रस- इस योग का सेवन स्त्री और पुरुष दोनों ही के लिए लाभकारी रहता है और यह बहुत ही प्रसिद्ध योग है। इसकी 1-1 गोली सुबह और शाम पीसकर इसमें 1.5 चम्मच मक्खन और मिश्री मिलाकर प्रयोग करने से स्त्री और पुरुष दोनों ही की संभोग करने की शक्ति और रुचि में वृद्धि होती है। इसके ऊपर से दूध में पिंड खजूर को उबालकर खाएं और दूध को पी लें। इसका सेवन करने से लगभग 10 दिनों के अंदर ही शरीर में काम-उत्तेजना जागृत होने लगती है।

          किसी स्त्री या पुरुष को किसी दुर्घटना या दिमागी चोट के कारण संभोग करने की इच्छा न करती हो तो इसका सेवन करने से उनकी संभोग करने में रुचि जागृत होने लगती है। इसके सेवन से लिंग की नसों में रक्त का संचार होने लगता है जिससे लिंग ज्यादा उत्तेजित होता है और संभोग शक्ति में चरम सुख प्राप्त होता है। जिन दंपतियों के घर में कोई संतान पैदा नहीं होती वह भी इसका सेवन करने से संतान प्राप्ति कर सकते हैं।

वानरी गुटिका- लगभग 150 ग्राम कौंच के बीजों को 2 लीटर दूध में डालकर उबाल लें। उबलने पर जब दूध गाढ़ा हो जाए तो इसे नीचे उतारकर ठंडा कर लें और बीजों के छिलके उतार लें। इसके बाद इन बीजों को बिल्कुल बारीक पीसकर रख लें। अब बीजों की पिट्ठी बनाकर इतनी ही मात्रा में मैदा मिलाकर एकसाथ गूंथ लें। फिर इसमें थोडा सा गिल्ट और मिल्कमेड का गुलाब जामुन पाउडर मिलाकर छोटे-छोटे आकार के गोले बनाकर गाय के घी में हल्का गुलाबी होने तक तलें। इन्हे एकतार की चाशनी में डालते जाएं। ठंडा होने के बाद इस चाशनी में ही शहद डालकर किसी कांच के बर्तन में सुरक्षित रख लें। इस 1-1 गुलाब जामुन को सुबह और शाम सेवन करने से पुरुष के शरीर में संभोग करने की शक्ति बहुत तेज हो जाती है।

संभोगशक्ति वढ़ाने वाले पकवान-

सिंघाड़े का हलवा- सबसे पहले लगभग 25 ग्राम सिंघाड़े का आटा, 25 ग्राम घी, 50 ग्राम चीनी और 250 ग्राम दूध ले लें। इसके बाद सिंघाड़े के आटे में घी डालकर हल्की आग पर लाल होने तक पकने के लिए रख दें। जब यह आटा अच्छी तरह से सिक जाए तो इसमें दूध डालकर पकाएं और हलुए की तरह सेक लें। जब यह गाढ़ा हो जाए तो इसमें चीनी डालकर चलाएं और तैयार होने के बाद नीचे उतार लें। इस हलुए को रोजाना सुबह नाश्ते में खाने और ऊपर से दूध पीने से वीर्य की बढ़ोतरी होती है और संभोग करने की शक्ति तेज होती है।

छुआरे का हलुवा- छुआरे का हलुवा बनाने के लिए 50 ग्राम छुआरे. 50 ग्राम घी, 300 ग्राम दूध, 50 ग्राम पिसी हुई मिश्री और 2 इलायची के पीस ले लें। इसके बाद छुआरों के बीजों को निकाल लें और बीज निकले हुए छुआरों को 250 ग्राम दूध में उबाल लें तथा बारीक पीस लें। इसके बाद कड़ाही में घी डालकर पिसे हुए छुआरों को इसमें डालकर भून लें। जब यह लाल हो जाए तो इसमें दूध डालकर पकाएं और गाढ़ा हो जाने पर इसमें पिसी हुई मिश्री मिला लें। अब इसमें इलायची के दानों का पाउडर मिलाकर अच्छी तरह से मिला लें। अब हलुआ तैयार है। इस हलुए को पाचन शक्ति के अनुसार 30 से 60 ग्राम की मात्रा में रोजाना सुबह-सुबह खाकर ऊपर से दूध पीने से शरीर में बल और वीर्य की मात्रा बढ़ती है, संभोग शक्ति तेज होती है और शरीर मजबूत बनता है।

उड़द की खीर-  उड़द की दाल को घी में भूनकर उसमें दूध डालकर पकाएं। जब खीर तैयार हो जाए तो उसमें चीनी मिलाकर नीचे उतार लें। इस खीर को रोजाना सुबह नाश्ते के रूप में सेवन करने से वीर्य की बढ़ोत्तरी और संभोग करने की शक्ति तेज होती है।

सफेद मूसली की खीर-  सफेद मूसली की खीर तैयार करने के लिए सबसे पहले 10 ग्राम सफेद मूसली का चूर्ण, 250 ग्राम गाय का दूध और 20 ग्राम पिसी हुई मिश्री लें लें। इसके बाद मूसली के चूर्ण को दूध में मिलाकर उबाल लें। उबलने पर जब यह गाढ़ा हो जाए तो इसमें पिसी हुई मिश्री मिलाकर नीचे उतार लें। इस मिश्रण को ठंडा करके नियमित रूप से सेवन करने से वीर्य की बढ़ोत्तरी होती है, धातु की कमजोरी समाप्त होती है, नपुंसकता रोग में लाभ मिलता है और शीघ्रपतन रोग दूर होता है।

नारियल के लड्डू-  नारियल के लड्डू बनाने के लिए सबसे पहले 250 ग्राम कच्चे नारियल की कद्दूकस करी हुई गिरी, 50 ग्राम घी, 125 ग्राम मावा, 250 ग्राम चीनी और 10 छोटी इलायची को पीस लें। इसके बाद लगभग 25 ग्राम घी को कड़ाही में डालकर उसके अंदर नारियल की गिरी को मिलाकर भून लें। अब बचे हुए घी को मावे के साथ मिलाकर भून लें। इसके बाद दोनों भुनी हुई चीजों को आपस में मिला लें। अब इसके अंदर चीनी की चाशनी बनाकर मिला लें और इलायची का बारीक पिसा हुआ चूर्ण भी डाल लें। इस मिश्रण के 20-20 ग्राम के लड्ड़ू बनाकर 1-1 लड्ड़ू रोजाना सुबह और शाम दूध के साथ सेवन करने से धातु की कमी, कमजोरी, वीर्य की कमी होना आदि रोग दूर हो जाते हैं।

वाजीकरण औषधि का सेवन करते समय परहेज करने योग्य बातें-

          जिस तरह से आर्युवेद की किसी भी औषधि का सेवन करते समय क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए इस बात का खासतौर पर ध्यान रखा जाता है उसी तरह से वाजीकरण औषधि का प्रयोग करते समय भी व्यक्ति को कई तरह के परहेजों से गुजरना पड़ता है। इसके सेवन काल के दौरान व्यक्ति को जल्दी पचने वाला और पौष्टिक भोजन करना चाहिए। क्योंकि इस औषधि का सेवन करने के दौरान कब्ज का रोग बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए। भोजन में हरी सब्जियां. मौसमी फल, खिचड़ी, मोटे आटे की रोटी, दूध, सलाद, दलिया आदि का सेवन ज्यादा मात्रा में करना चाहिए। व्यक्ति को खटाई, खट्टे फल, तंबाकू, गुटखा, पान, शराब आदि का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए।