भारतीय हॉकी कोच माइकल नोब्स ने कहा है कि अनुशासनहीनता के आरोप में प्रतिबंधित होने के बाद राहत पाए ड्रैग फ्लिकर संदीप सिंह और मिडफील्डर सरदारा सिंह के लिए माफी मांगने भर से काम नहीं चलेगा बल्कि उन्हें भविष्य में खुद को साबित करना होगा।
नोब्स ने कहा कि हालांकि मैं इस फैसले का स्वागत करता हूं लेकिन बेहद महत्वपूर्ण मौके पर दोनों टीम से बाहर निकलना अब भी सालता है और उनके इरादों के बारे में अब भी कुछ पक्की तौर कहा भी नहीं जा सकता है। उन्हें केवल लिखित माफी पेश करने के बजाय कुछ ठोस आश्वासन देना चाहिए था।उन्होंने कहा कि दोनों खिलाड़ियों को दूसरों के मुकाबले अधिक मेहनत करनी पड़ेगी और अपनी फिटनेस के साथ साथ टीम के प्रति अपना समर्पण भी साबित करना होगा। जब भी टीम को जरूरत होगी, उन्हें खुद को साबित करना पड़ेगा।
दोनों खिलाड़ियों ने अपील समिति के समक्ष बिना शर्त अपनी गलती मान कर खेद जताते हुए प्रतिबंध हटाने की मांग की जिसे इन खिलाड़ियों की उम्र, प्रदर्शन और भविष्य में प्रदर्शन की उनकी क्षमताओं को देखते हुए स्वीकार कर लिया गया।नोब्स ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि इन दोनों का रिकॉर्ड उन्हें बेहतर हॉकी खिलाड़ियों में शामिल करता है लेकिन मेरे लिए और टीम के लिए उन्हें खुद को साबित करना होगा क्योंकि उन्हें दोबारा टीम में शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के ठीक पहले इस तरह की घटना से भी याद करने लायक नहीं कही जा सकती है लेकिन इसी घटना कीसे टीम को अपनी क्षमता और अंदरूनी शक्ति को पहचानने में मदद मिली। कोच ने कहा कि मैं हमेशा से चाहता हूं कि टीम में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हों लेकिन यह भी जरूरी है कि वे सही नीयत के साथ खेलें। मैं कह चुका हूं कि मैं टीम के नियम कायदों के खिलाफ किसी भी खिलाड़ी का कोई भी व्यवहार बर्दाश्त नहीं करुंगा और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाऊंगा फिर चाहे वह कोई भी हो।


