टीम में चल रही कलह उभर कर सामने आ गई है। खिलाड़ी तो खिलाड़ी उनके घरवाले भी मैदान-ए-जंग में कूद पड़े। कप्तान महेंद्र सिंह धौनी की पत्नी साक्षी ने धौनी-विरोधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इसके लिए उन्होंने सबसे बेहतर प्लेटफार्म यानी सोशल नेटवर्किंग साइट का सहारा लिया। ट्वीट कर कहा कि कुछ लोग धौनी को नीचे धकेलने की कोशिश में लगे हुए हैं। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा किन लोगों की ओर है यह अब किसी से छुपा नहीं रह गया है।
वीरेंद्र सहवाग के बाद सचिन तेंदुलकर और गौतम गंभीर भी जब धौनी की 'हिट-लिस्ट' में शामिल होते दिखे तो मामले ने जमकर तूल पकड़ा। तेंदुलकर अब तक चुप हैं, लेकिन धौनी, सहवाग और गंभीर के सार्वजनिक बयानों ने टीम इंडिया के अंदर चल रही खेमेबाजी और कलह की अटकलों को पुख्ता करने में कसर नहीं छोड़ी। केवल सचिन, सहवाग और गंभीर को एक-एक मैच में बाहर बैठाने की धौनी की नीति ने कप्तान की नीयत पर सवालिया निशान लगाए।
धौनी ने इस आधार पर टीम में तीन शीर्ष बल्लेबाजों को रोटेट करने की प्रणाली का बचाव किया था कि वे क्षेत्ररक्षण में धीमे हैं, लेकिन मंगलवार को श्रीलंका के खिलाफ मैच हारने के बाद सहवाग ने यह कहकर इस मुद्दे को नया मोड़ दे दिया कि सीनियर खिलाड़ियों को कभी नहीं बताया गया कि क्षेत्ररक्षण इसका कारण था। इससे पहले गंभीर ने भी मैच जल्दी खत्म नहीं करने और इसे अंतिम ओवर तक ले जाने के लिए धौनी की आलोचना की थी।
सचिन क्यों हैं चुप..
-धौनी की रोटेशन नीति को चुपचाप स्वीकार करने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को अब अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए। वह भी तब जबकि खुद उनके वनडे करियर पर सवाल उठाए जाने लगे हैं। सहवाग ने मंगलवार को जो कहा, वह चौंकाने वाला बयान है।
उनके मुताबिक धौनी या टीम प्रबंधन ने उनके अलावा सचिन और गंभीर को भी रोटेशन का कारण यह बताया था कि तीन साल बाद ऑस्ट्रेलिया में होने वाले विश्व कप के लिहाज से युवाओं को ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं से वाकिफ होने का मौका देने के मकसद से ऐसा किया जा रहा है। ऐसे में सचिन ही सामने आकर साफ कर सकते हैं कि माजरा आखिर क्या है। रोटेशन को लेकर उनसे क्या कहा गया था। टीम में मतभेद हैं या नहीं, यह भी लोग उनके मुंह से सुनना चाहते हैं। सभी को भरोसा है कि वे सच ही बोलेंगे। उन्हें अब बोलना चाहिए। यह टीम के हित में भी होगा। नहीं तो बहुत देर हो जाएगी। मौजूदा हालात में यदि टीम तिकोनी सीरीज में बेइज्जत हो स्वदेश लौटती है, तो उसके बाद तिनकों में बिखर जाएगी। यदि सचिन नहीं बोलते हैं तो धौनी खुद स्थिति स्पष्ट करें। उनके यह बोल देने से कि वे कभी भी कप्तानी छोड़ने के लिए तैयार हैं, स्थिति साफ नहीं हो जाती।
साक्षी के ट्वीट का सच
-टूर के दौरान वह समुद्र तट पर धौनी की बाहों में बाहें डाले घूमती हुईं या शॉपिंग करती हुईं और या फिर दर्शकदीर्घा में बैठ मीडिया की सुर्खियों में बनी रही हैं, लेकिन टीम और खेल की बातों को लेकर इससे पहले कभी भी साक्षी ने हस्तक्षेप नहीं किया। लेकिन ऐसा क्या हुआ कि इस बार सब्र का बांध टूट गया। या फिर किसी सोची-समझी रणनीति के तहत उनसे यह हस्तक्षेप कराया गया। जो बात धौनी मीडिया के सामने नहीं कह सकते थे, वह साक्षी ने ट्वीट के जरिए कह डाली।
ट्वीट किया-'आप [धौनी] उन लोगों की परवाह न करें, जो आपको नीचे गिराने पर तुले हुए हैं। बस इतना याद रखें कि हम सभी आप के साथ थे और हमेशा रहेंगे। ..वक्त खुद उन लोगों का मुंह बंद कर देगा..।'
जाहिर है, मिसेज धौनी का इशारा आलोचकों औैर मीडिया की ओर कतई नहीं है। उन्हें पता है कि आलोचक और मीडिया केवल अपना काम करते हैं। इन्हीं ने धौनी को 'धुरंधर' और 'करिश्माई कप्तान' का तमगा दिया और सिर आंखों पर बैठाया।
ट्वीट की टाइमिंग से पता चल जाता है कि साक्षी का इशारा किसकी ओर है। यह ट्वीट मंगलवार को सहवाग की प्रेस कांफ्रेंस के ठीक बाद आया। मीडिया अटकलें लगा रहा है कि सहवाग कप्तान बनना चाहते हैं और कुछ खिलाड़ी भी उनके साथ हैं। साक्षी इसे 'नीचे गिराने' के रूप में तो नहीं देख रहीं। बुधवार को उन्होंने यह ट्वीट अपने अकाउंट से हटा लिया, लेकिन तब तक यह सुर्खियां बटोर चुका था।
टीम में कोई मतभेद नहीं
-भारतीय क्रिकेट बोर्ड [बीसीसीआई] ने टीम में मतभेद की अटकलों को खारिज कर दिया। अध्यक्ष एन श्रीनिवासन ने कहा कि यह 'बढ़ा चढ़ाकर' पेश की गई मीडिया रिपोर्ट है।
श्रीनिवासन ने यहा आइपीएल संचालन परिषद की बैठक के बाद कहा, 'मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है। मुझे नहीं लगता कि टीम में कोई मतभेद है। चिंता की कोई बात नहीं है। वे [खिलाड़ी] प्रेस काफ्रेस में ऐसे सवालों का जवाब दे रहे थे। यह हर मैच के बाद होता है। मैंने मीडिया मैनेजर से बात की। मुझे लगता है कि रिपोर्टों को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया है।'
बीसीसीआइ उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने कहा, 'सहवाग का बयान तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है। हमें यही पता चला है। टीम में कोई मतभेद नहीं है। यह मीडिया द्वारा लगाई जा रही अटकलें हैं। मुझे नहीं लगता कि कोई समस्या है। बीसीसीआइ लगातार टीम के संपर्क में है।'
रोटेशन प्रणाली ने काफी विवाद खड़ा कर दिया है, इसके बारे में पूछने पर शुक्ला ने कहा, 'अंतिम एकादश का फैसला टीम प्रबंधन करता है, जिसमें मैनेजर, कप्तान और कोच शामिल हैं।'
बोर्ड पर बरसे कपिल
-टीम इंडिया में मतभेद की खबरों के बीच पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव ने बीसीसीआइ को निशाने पर लिया। उन्होंने बोर्ड पर आरोप लगाया कि इतना सब होने के बावजूद वह केवल तमाशा देख रहा है, जबकि उसे एक्शन लेना चाहिए।
कपिल ने कहा कि वह इसे टीम के अंदर 'मतभेद' करार नहीं देंगे बल्कि इसे 'नजरिए में अंतर' कहेंगे। उन्होंने यहा ऑस्ट्रेलिचइच् उच्चायोग में युवाओं के लिए आयोजित क्रिकेट क्लीनिक के दौरान कहा, 'कप्तान धौनी की राय अलग होगी और आम तौर पर उसके नजरिए का सम्मान किया जाता है। मुझे लगता है कि टीम और देश की बेहतरी के लिए बीसीसीआइ को आगे आकर खिलाड़ियों के साथ इस मामले को सुलझाना चाहिए।'
उन्होंने कहा, इस मुद्दे पर टिप्पणी करना काफी मुश्किल है क्योंकि हम नहीं जानते कि ऑस्ट्रेलिया में असल में क्या हुआ है। खिलाड़ियों को समझना होगा कि देश का सम्मान उनसे जुड़ा है। अगर कोई गलतफहमी है तो इसका निपटारा किया जाना चाहिए। वे देश के लिए खेल रहे हैं। हमें खिलाड़ियों को विश्व चैंपियन की तरह खेलने और मैच जीतने के लिए प्रेरित करना चाहिए। वे विश्व चैंपियन हैं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया से लौटने के बाद बीसीसीआइ और चयनकर्ताओं को साथ बैठकर पता करना चाहिए कि टीम के साथ क्या गलत हुआ।
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