लव-मंत्र : शादी के बाद भी बने रहें वेलेंटाइन

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Love - Spells: Valentine stay after marriageहेलो दोस्तों! आप जिस मंजिल को पाने की अनेक कल्पनाएं करते हैं, उसके बिल्कुल करीब पहुंचकर अचानक ठिठक से जाते हैं। खुशी, डर व आशंकाओं का मिला-जुला सा असर आपको बेचैन कर देता है। आपका मन यह सोच-सोचकर विचलित होता है कि आनंद व सुकून की आपकी परिकल्पना क्या सचमुच साकार होगी या फिर कोरी कल्पना ही रहेगी। आपको यह विचार सताता है कि क्या आपका फैसला आपको अक्लमंद साबित करेगा या फिर आप जीवन भर पछताते रहेंगे।

आप जिस खुशी के लिए जितना इंतजार करते हैं उसके करीब आने की घड़ी आपको उतना ही बेचैन करती है और आप सैकड़ों सवालों का जवाब अपने अंतर्मन में खोजते रहते हैं। यह कशमकश सबसे ज्यादा पेश आती है एक रिश्ते को स्थायी रूप देने में। रिश्ते को लेकर सपनों का ताना-बाना इतने निजी रूप में बुना जाता है कि आप भूल जाते हैं कि उसका दूसरा सिरा किसी और के हाथ में है। इसके एहसास के साथ ही घबराहट में इजाफा होता जाता है।

ऐसी ही नाजुक हालत से गुजर रही है सीमा (बदला हुआ नाम)। सीमा और अमर (बदला हुआ नाम) एक-दूसरे से पिछले चार सालों से प्रेम करते हैं और अब वे शादी करने वाले हैं। खुश होने के बजाय सीमा चिंतित रहती है। उसे चिंता है कि क्या शादी के बाद भी उसका रोमांस व प्यार बरकरार रहेगा? दूसरी बात जो उसे सबसे ज्यादा सता रही है वह है उसका गुस्सा। उसे डर है कि अमर के माता-पिता का बर्ताव यदि उचित नहीं रहा तो उसे गुस्सा आ जाएगा।

सीमा जी, आपके पहले डर का उपचार खुद आपके ही हाथों में है। अक्सर दो लोग जब साथ रहने लगते हैं तो अस्त-व्यस्त से पड़े रहते हैं। उन्हें लगता है अपनों को क्या प्रभावित (इंप्रेस) करना। पर यह धारणा उतनी सही नहीं है। खुद को फिट, चुस्त-दुरुस्त रखना अपने लिए होता है। ऐसा कर आपको अच्छा लगता है और आप खुश रहते हैं जिससे दूसरे भी खुश रहते हैं।

समय निकालकर बाहर घूमना, दोस्तों से मिलना, म्यूजिक सुनना जो अब तक अच्छा लगता रहा है वह आपको शादी के बाद भी लगेगा इसलिए अपने रिश्ते में रंग भरने के लिए ये सारी कवायद जारी रखें। घर पर भी बातें करते हुए आप भोजन कर सकते हैं। जिस प्रकार देर तक बातें करते हुए आप दोनों को साथ खाना पसंद है वही माहौल आप घर पर भी बना सकती हैं।

अच्छी पोशाक, अच्छा डिश और घर की छोटी-मोटी सजावट माहौल में ताजगी भरती है। आप दोनों में बहुत अच्छा संवाद है। हर छोटी-बड़ी बात का आप दोनों मजा लेते हैं और अमर आपकी पसंद और राय को अहमियत भी देते हैं, फिर क्या डरना। इस डर का निवारण मूलतः आपके हाथों में है। न तो बहुत औपचारिक बनें और न ही इतने अनौपचारिक कि एक-दूसरे से ऊब ही होने लगे। एक-दूसरे को अच्छा लगाने की जो तरकीबें आज करते हैं वे शादी के बाद भी जारी रखें।

रही बात गुस्से की। आपके गुस्से से अमर वाकिफ है पर उसके घर वाले नहीं। आपने अब तक जितना उन्हें जाना है, उसमें आपको अमर के पिता पर बहुत गुस्सा करने की आशंका नजर आती है। अमर के पिता आपकी बातों को घुमा-फिराकर ताना कसने वाले मनुष्य लगे। आपको लगता है, एक-दो बार उनके ताने सुनने के बाद आपका गुस्सा फट पड़ेगा और यदि आप उन पर गुस्सा नहीं निकाल पाएंगी तो आप घुटन से अपना निजी जीवन बर्बाद करेंगी। उनसे मिलने के बाद अभी से ही आपको तनाव होने लगता है।

एक बात तो तय है कि आप या कोई भी उन्हें अब बदल नहीं सकता है। गुस्सा आने पर आप यदि उसे नहीं निकालेंगी तो तनाव से आपके जीवन में घुन लग जाएगा। एक ही तरीका बचता है कि आपको गुस्सा आए ही नहीं। जब सामने वाला अपनी हरकतों से बाज नहीं आ सकता है तो एक ही उपाय है कि अपनी सोच बदल लें। आप उनके प्रति दया करना शुरू करें। सच तो यह है कि वे दया के पात्र हैं।

कई लोगों की आदत होती है कि उकसा कर या दुख पहुंचाकर उन्हें सुकून मिलता है। जब आप यह बात समझ लेंगी तो आपका मन आपके नियंत्रण में होगा, न कि उनके। अगर आप चीखेंगी, चिल्लाएंगी तो उनकी गलती दब जाएगी और आपको सभी मन ही मन दोषी मानेंगे। औरों की छोड़िए आप खुद को गुनहगार समझेंगी।

बेहतर यही है कि आप उनकी बातों को अधिक महत्व ही न दें। आप ऐसे सोचें कि वे अपनी इस आदत के कारण आपका सम्मान नहीं पा सके। सबसे अच्छी बात यह है कि अमर और उसकी मां में वह अवगुण नहीं है और बड़ी संख्या आप जैसों की है। इसलिए खुशी-खुशी नया जीवन शुरू करें।

यह बात सिर्फ सीमा के लिए नहीं बल्कि हर एक उस जोड़े के लिए है जिसके मन में यह ख्याल पैदा होते हैं। इस वैलेनटाइन आप भी अपनी सारी बुरी आदतों को दरकिनार करें और बनें अपने प्यार के लिए एक अच्छा वेलेंटाइन।