फिल्म 'जाने तू या जाने ना' के इमरान खान और 'म्याऊं' डिसूजा (यानी जेनेलिया) दोस्ती और प्यार की उलझन में फंस जाते हैं। एक-दूसरे के गहरे, समझदार और अच्छे दोस्तों में प्रेम की भावना का आ जाना...वाकई उलझनभरी स्थिति है। दो विपरीत लिंगी अच्छे और बेहद सच्चे दोस्त हो सकते हैं, लेकिन बीच में यदि यह भावना किसी दूसरी भावना में बदलने लगे तो एक बार शांत होकर स्थिति पर गौर करना आवश्यक हो जाता है। वरना न प्रेम जीवित रह पाता है न दोस्ती...।
आप कह सकते हैं कि वह कोई नई बात नहीं है। अगर अपनी ही पुरानी दोस्त से प्यार हो जाए तो यह अच्छी बात है। लेकिन कहने योग्य बात यह है कि पुराने दोस्त से प्यार होना एक बड़ा सिरदर्द भी बन सकता है। यकीन न हो तो एकबारगी अविनाश की कहानी पर गौर करें। अविनाश और सुनीता बचपन के दोस्त हैं। स्कूल के दिनों में अविनाश खुद सुनीता के लिए परफेक्ट मैच तलाशता था। ठीक यही काम सुनीता भी करती थी।
लाइफ को दोनों फुल इंज्वॉयमेंट के साथ जीते थे। लेकिन धीरे-धीरे अविनाश ने महसूस किया कि उसे सुनीता का किसी लड़के से बात करना अच्छा नहीं लगता। यही नहीं अगर सुनीता उसे बिना बताए कहीं चली जाती तो भी अविनाश को बुरा लगता था। दोस्त होने के नाते सुनीता कई बार अविनाश की बात सुनती थी। लेकिन उसके मन में कभी भी अविनाश के प्रति कोई ब्वॉयफ्रेंड वाली भावना उत्पन्ना नहीं हुई।
इससे समस्या यह हुई कि अविनाश दिन पर दिन उससे कटने लगा। सुनीता को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर यकायक अविनाश का रवैया उसके प्रति इतना बदल कैसे गया? अंततः सुनीता ने उससे पूछा कि आखिर असली मुद्दा क्या है। जैसे-तैसे हिम्मत कर अविनाश ने उसे अपनी दिल की बात बताई तो सुनीता ने उसकी बात को हंसकर टाल दिया। उसे यकीन ही नहीं हुआ अविनाश वाकई उसे प्यार करता है। असल में उसे लगा कि अविनाश बाकी लड़कियों की तरह अविनाश उसके साथ भी टाइम पास करने की कोशिश कर रहा है। अविनाश सुनीता को यह यकीन नहीं दिला पाया कि वह वाकई उससे प्यार करता है।
असल में जब दो दोस्त एक-दूसरे से प्यार करने लगते हैं तो अपने दिल का हाल बता पाना काफी कठिन हो जाता है बनिस्बत उनके जो दोस्त नहीं हैं। हालांकि यह भी सच है कि आज तक जितने भी लोगों की दोस्ती प्यार में बदली है, उनके रिलेशन अन्य कपल की तुलना में ज्यादा मजबूत होते हैं, लेकिन जब दोनों में से एक भी शख्स को यह लगने लगे कि उनकी दोस्ती प्यार में नहीं बदल सकती तब मामला गड़बड़ हो सकता है। यही नहीं अपना रिलेशन सक्सेस न हो पाने के कारण ऐसे लोग दूसरों के साथ अपनी खुशी भी तलाश नहीं कर पाते।
दोस्ती में प्यार तलाशना एक बड़ी चुनौती भी है। दरअसल ऐसे दूसरे की सारी अच्छी-बुरी बातों से वाकिफ होते हैं। ऐसे में दोनों के पास एक-दूसरे की कोई नई बातें जानने के लिए बाकी नहीं होतीं। इसलिए चैलेंज यह होता है कि रिश्ते में नयापन कैसे बरकरार रहे। ऐसे में दोनों पार्टनर्स को चाहिए कि वे अपनी बातों का मुद्दा व्यापक रखें। ध्यान रहे दोस्ती का रिलेशन जितना मजबूत होता है, लव रिलेशन की डोर उतनी ही नाजुक होती है। यहां आपकी जरा सी चूक न सिर्फ दोस्ती को बिखेर सकती है बल्कि आपके लव रिलेशन में भी फुलस्टॉप लगा सकती है।
दोस्ती में एक अच्छी बात यह होती है कि अन्य कपल की तुलना में इसमें औपचारिकता नहीं होती, लेकिन इसके अलावा कई चुनौतियां होती हैं। इसलिए ध्यान से इस रिश्ते को सहेजें क्योंकि यहां कई अन्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।


