घुटने में तकलीफ रहती है तो सावधान..

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be careful to have a knee problemघुटने में तकलीफ रहती है तो सावधान हो जाएं। यह आर्थराइटिस की समस्या भी हो सकती है। अब तो यह समस्या उम्र भी नहीं देखती। बुजुर्गों के साथ अब यह समस्या युवाओं और बच्चों को भी परेशान करने लगी है।

अर्थराइटिस यानी घुटनों में दर्द की समस्या को बुजुर्गों की समस्या माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ सालों में युवा और बच्चों तक इस बीमारी के शिकार होते जा रहे हैं। खासकर दिल्ली व तमाम शहरों में तेज रफ्तार जिंदगी के कारण खानपान, व्यायाम आदि पर उचित ध्यान न दिए जाने से यह समस्या पैदा होती है।

आर्थराइटिस एक ऐसी बीमारी है, जिसका शरीर के जोड़ों और मांसपेशियों पर असर पड़ता है। मरीज के पैरों और हड्डियों के जोड़ों में तेज दर्द होता है, जिससे चलने-फिरने में भी तकलीफ हो सकती है। कुछ खास तरह के आर्थराइटिस में शरीर के दूसरे अंग भी प्रभावित होते हैं। ऐसे में दर्द के साथ दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं।

आमतौर पर देखा जाता है कि हर घुटने के दर्द को लोग आर्थराइटिस समझ लेते हैं, जबकि घुटनों में दर्द के कई कारण हो सकते हैं तथा उनका इलाज भी भिन्न-भिन्न है। सही जांच तथा समय पर सही फिजियोथेरेपी महत्वपूर्ण है। फिजियोथेरेपी से तो हड्डियों की कई बीमारियां जड़ से दूर हो जाती हैं। इसमें व्यायाम के जरिय मांसपेशियों को सक्रिय बनाकर इलाज किया जाता है। इसमें एक सप्ताह से लेकर कई महीने लग जाते हैं।

आर्थराइटिस के कारण

- घुटने में चोट लगना, घुटनों पर ज्यादा जोर देना।

- लंबे समय तक एक ही अवस्था में बैठना या खड़े रहना।

- हड्डियों का बढ़ जाना एवं मांसपेशियों का कमजोर हो जाना।

- उम्र का 40 वर्ष से ज्यादा होना जिससे हड्डियां प्राय: घिस जाती हैं या कमजोर हो जाती हैं।

- जिम में विशेषज्ञों की अनुपस्थिति में व्यायाम करना।

- अपना वजन, खान-पान का स्तर, उम्र, दर्द के कारण, शरीरिक संरचना को जाने बिना टीवी पर देखकर या दूसरे व्यक्ति को देखकर योग व अन्य व्यायाम करना।

- घुटनों से सायनोवियल फ्लड (घुटनों के जोड़ के बीच मौजूद तरल पदार्थ) का निकलना।

- घुटनों के ऑपरेशन के बाद फिजियोथेरेपी नहीं करवाना।

- ऑटोइम्यून (भ्रमित प्रतिरक्षी प्रक्रिया के कारण होने वाली) बीमारियों का होना। रिवमेट्वायड आर्थराइटिस यानी रुमेटी गठिया इसी श्रेणी में आती है।

- गलत नाप, आकार-प्रकार तथा हील के चप्पल जूते पहनना।

- व्यायाम अचानक छोड़ देना।

घुटने का दर्द

घुटना एक कमजोर सायनोवियल जोड़ हैं। यह शरीर का सबसे बड़ा तथा जटिल जोड़ है। इस जोड़ में चार हड्डियां शामिल होती हैं। लगभग 15 मांसपेशियां, 13 वर्सा (गद्दीदार संरचनाएं), कई लिगामेंट, मेनिस्कस आदि भी इस जोड़ से संबद्घ होती हैं। इन कारणों से घुटने में दर्द के कारण तथा स्थान अलग हो सकते हैं।

इस दर्द से बचाव

- अपने वजन को उम्र, ऊंचाई एवं शारीरिक बनावट के अनुसार उचित रखना चाहिए। इसके लिए प्रिवेंटिव फिजियोथेरेपी के अन्तर्गत विशेष व्यायाम करना चाहिए।

- औसतन 1 से डेढ़ घंटे लगातार खड़े रहने के पश्चात् घुटनों को 5-10 मिनट का आराम देना चाहिए।

- चप्पल, जूते सही आकार-प्रकार के ही प्रयोग में लाना चाहिए।

- जिम में हमेशा विशेषज्ञों तथा कुशल फिजियोथेरेपिस्ट के निर्देशन में ही व्यायाम करना चाहिए तथा वजन उठाना चाहिए।

- नियमित रूप से डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा बताए गए घुटनों के विशिष्ट व्यायाम करना लाभदायक होता है।

- खानपान में कैल्शियम से परिपूर्ण आहार लेना चाहिए।

कैसे पाएं आराम

यह बीमारी आजीवन रहने वाली है, लेकिन अपने शरीर में कुछ बदलाव लाकर आप आर्थराइटिस के तीव्र दर्द को कम कर सकते हैं। इसके लिए कुछ उपाय भी जरूरी हैं।

- अपना वजन नियंत्रित रखें क्योंकि ज्यादा वजन से घुटने तथा कूल्हों पर दबाव पड़ता है।

- कसरत तथा जोड़ों को हिलाने से भी आपको मदद मिलेगी। जोड़ों को हिलाने में आपके डॉक्टर या नर्स भी आपकी मदद कर सकते हैं।

- समय-समय पर अपनी दवा लेते रहें। इनसे दर्द और अकड़न में राहत मिलेगी।

- सुबह गर्म पानी से नहाएं।

- डॉक्टर से समय-समय पर जांच कराते रहें।

मजबूत हड्डियों के लिए खाने की 10 चीजें

1. कम फैट वाला दूध 2. अंडे 3. पनीर 4. रागी या मड़आ 5. पालक 6. अंजीर 7. अजवाइन के पत्ते 8.मेथी के पत्ते 9.मछली 10. बादाम दिल्ली में भी जागरूक नहीं हैं लोग

दिल्ली में भी लोग आर्थराइटिस के प्रति जागरूक नहीं है। आर्थराइटिस फाउंडेशन ऑफ इंडिया द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में यह बात सामने आई कि यहां जागरूकता 10 प्रतिशत से भी कम है। कम-से-कम इतना तो मालूम होना ही चाहिए कि आर्थराइटिस है क्या, यह किन-किन कारणों से होता है और इसकी जांच व इलाज के लिए क्या-क्या करना चाहिए। खासकर दिल्ली में यह जिन कारणों से होता है, उनमें प्रमुख हैं-पर्याप्त शारीरिक मेहनत की कमी, उचित मार्गदर्शन में पर्याप्त कसरत की कमी, छोटी-छोटी चोटों को नजरअंदाज करना जो 3-4 साल बाद इस बीमारी का रूप ले लेती हैं।

डॉ. सुशील शर्मा

अध्यक्ष-आर्थराइटिस फाउंडेशन ऑफ इंडिया जरूरत पड़े तो ऑपरेशन न हिचकें

आर्थराइटिस का इलाज ऑपरेशन से भी संभव है। कानपुर के रीजेंसी अस्पताल के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. राघवेंद्र जैसवाल का मानना है कि यदि घुटने का इलाज सही समय पर किया जाए तो सफलता का प्रतिशत 99 प्रतिशत तक हो सकता है।

डॉ. जैसवाल कहते हैं, आर्थराइटिस के ऑपरेशन के 24 घंटे बाद मरीज को आराम मिल जाता है। डॉ. राघवेंद्र ऑपरेशन के कई विकल्प भी सुझाते हैं। उनके अनुसार, आर्थराइटिस की समस्या हो तो मेडिटेशन, जीवन शैली में बदलाव के अलावा स्थानीय स्तर पर फिजियोथेरेपी कराई जा सकती है। यदि ये सभी चीजें असफल साबित होती हैं तो व्यक्ति को सर्जरी करानी चाहिए।