सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार की अर्जी- सिनेमाघरों में राष्ट्रगान की अनिवार्यता हो खत्म

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (08 जनवरी) को हलफनामा देकर कहा है कि सिनेमाघरों में राष्ट्रगान की अनिवार्यता को फिलहाल स्थगित कर दिया जाय और नवंबर 2016 से पहले की स्थिति बरकरार रखी जाय। राष्ट्रगान की अनिवार्यता पर सरकार ने कोर्ट को बताया कि एक अंतर मंत्रालयी कमेटी बनाई गई है, जो छह महीने में अपना सुझाव देगी। कमेटी से सुझाव मिलने के बाद सरकार तय करेगी कि राष्ट्रगान की अनिवार्यता पर सर्कुलर या नोटिफिकेशन जारी किया जाय या नहीं। मंगलवार को भी इस मामले पर सुनवाई होगी।

दरअसल, 23 अक्टूबर, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह तय करने को कहा था कि सिनेमाघरों या अन्य स्थानों पर राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य हो या नहीं, इस पर सरकार नियामक तय करे और इस संबंध में सर्कुलर भी जारी करे। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा था कि सर्कुलर जारी करते वक्त इस बात का भी ख्याल रखा जाय कि सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश प्रभावित ना हों। सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार को यह भी सुनिश्चित करने को कहा था कि सिनेमाघर में लोग मनोरंजन के लिए जाते हैं, ऐसे में देशभक्ति का क्या पैमाना हो, इसके लिए कोई रेखा तय होनी चाहिए?

बता दें कि 30 नवंबर, 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी सिनेमाघरों में फिल्म का प्रदर्शन शुरू होने से पहले अनिवार्य रूप से राष्ट्रगान बजाने के निर्देश के लिए श्याम नारायण चोकसी की जनहित याचिका पर यह निर्देश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट नेयह भी कहा था कि इस तरह के नोटिफिकेशन या नियम बनाना संसद का काम है, इसे कोर्ट पर क्यों थोपा जा रहा है?

पीठ ने संकेत दिया कि वह नवंबर, 2016 के अपने आदेश में सुधार कर सकती है। इसी आदेश के तहत देशभक्ति और राष्ट्रवाद की भावना पैदा करने के मकसद से सिनेमाघरों में फिल्म के प्रदर्शन से पहले राष्ट्रगान बजाना और दर्शकों के लिए इसके सम्मान में खड़ा होना अनिवार्य किया गया था। न्यायालय ने कहा था कि जब राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान दर्शाया जाता है तो यह मातृभूमि के प्रति प्रेम और सम्मान को दर्शाता है।सुप्रीम कोर्ट ने कुछ समय बाद सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाए जाने के बारे में अपने आदेश में सुधार करते हुए शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को सिनेमाघरों में राष्ट्र्रगान के दौरान खड़े होने से छूट दे दी थी। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति अमिताव राय की खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया था कि राष्ट्रगान बजाए जाने के दौरान सिनेमाघरों के दरवाजे बंद करने की जरूरत नहीं है।