त्रिपुरा में ढहेगा “लाल किला”, पहली बार बीजेपी की बहुमत सरकार

देश के पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों और राजनेताओं के दावों-प्रतिदावों और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। 60 सदस्यों वाली त्रिपुरा विधान सभा के लिए 18 फरवरी को वोट डाले जाएंगे लेकिन अभी से ही कयास लगाने का दौर जारी है। न्यूज एक्स के ओपिनियन पोल के मुताबिक 25 सालों से सत्ता पर काबिज सीपीआईएम इस बार सत्ता से बेदखल होती नजर आ रही है। सर्वे के मुताबिक यहां पहली बार भाजपा की सरकार बनती दिखाई दे रही है। चैनल ने ओपिनियन पोल में दावा किया है कि भाजपा और आईपीएफटी के गठबंधन को 31 से 37 सीटें मिल सकती हैं जबकि सीपीआईएम को 23 से 29 सीटें हासिल हो सकती हैं। कांग्रेस एवं अन्य दलों को यहां एक भी सीट नहीं मिलने का अनुमान जताया गया है। कहा जा रहा है कि त्रिपुरा में पिछले 25 सालों से सीपीआईएम की सरकार रही है इसलिए माणिक सरकार के खिलाफ एंटी इन्कम्बेंसी फैक्टर हावी है। हालांकि, मुख्यमंत्री माणिक सरकार फिर से धनपुर से चुनाव जीतने में सफल होंगे।

सर्वे के मुताबिक राज्य में भाजपा का प्रसार बहुत ही तेजी से हुआ है। पूरे राज्य में बीजेपी की लहर दिख रही है। माणिक सरकार के खिलाफ उभरे असंतोष का फायदा यहां सिर्फ बीजेपी को मिलने का दावा किया गया है। सर्वे में कहा गया है कि बेरोजगारी और आदिवासियों के बीच स्वतंत्र त्रिपुरा की मांग एक अहम मुद्दा बनकर उभरा है। पूरे राज्य में 18 फरवरी को मतदान होगा जबकि 3 मार्च को वोटों की गिनती की जाएगी। राज्य की सभी बूथों पर इलेक्‍ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के साथ VVPAT सिस्‍टम का प्रयोग किया जाएगा।

कांग्रेस मुक्त भारत अभियान पर बढ़ रही बीजेपी असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में सरकार बनाने के बाद अब त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड में भी कमल खिलाने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रही है। अभी हा ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वहां सभा कर लौटे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी त्रिपुरा दौरे पर थे। सोमवार को मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने बीजेपी की हिन्दूवादी एजेंडे की आलोचना करते हुए कहा था कि बीजेपी देश को बांटना चाह रही है।