वाराणसी। देशभर के लगभग 12 हजार सिनेमा हाल सिनेमा प्रस्तावित सर्विस टैक्स के विरोध में 23 फरवरी को बंद रहेंगे। इस बाबत फिल्म फैडरेशन आफ इंडिया (एफएफआई) कल दिल्ली में बैठक कर आगे की रणनीति तय करी।
एफएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद लांबा ने बताया कि सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी के सहयोग से गत 19 फरवरी को वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के साथ हुई बैठक बेनतीजा रही। इसी वजह से छविगृहों की एक दिनी बंदी का फैसला किया गया।
ट्रेड से जुडे कारोबारियों का आरोप है कि सरकार फिल्मों के प्रिन्ट के राइर्ट ट्रांसफर यानी अधिकार हस्तांतरण के बहाने एक और टैक्स थोपना चाहती है। यदि बंदी हुई तो एक अनुमान के मुताबिक सरकार को लगभग दस करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होगा। मोशन पिक्चर्स एसोसिएशन दिल्ली के अध्यक्ष साक्षी मेहना ने बताया कि सालभर में करीब 200 फिल्में रिलीज होती हैं। उनमें सिर्फ छह-सात ही बिजनेस कर पाती है। उन्हीं गिनीचुनी फिल्मों के आधार पर इंडस्ट्री भारी बिजनेस के दावे कर आंकडे़ निकालती है। हकीकत यह है कि फ्लाप होने वाली शेष 99 प्रतिशत फिल्में को गिना ही नहीं जाता है।
बंदी को लेकर शहर के सिनेमा घरों के बाहर पोस्टर लगाए जा चुके है। एक्सजीवीटर आलोक दुबे के अनुसार तमाम दबाबों के कारण सिंगल स्क्रीन सिनेमा हाल तेजी से बंद हो रहे हैं। वहीं शासन 150 रुपए और उससे भी अधिक टिकट वाले मल्टीप्लेक्सों को पांच-पांच साल तक टैक्स में छूट दे रहा है। एसी दोहरी नीति सही नहीं है।


