अमिताभ और दिलीप कुमार पद्म विभूषण के लायक नहीं!

Hits: 56 smaller text tool iconmedium text tool iconlarger text tool icon

Amitabh Bachchan and Dilip Kumar Padma Vibhushan not fit!आपको जानकर हैरानी होगी कि इस बार पद्म विभूषण सम्मान पाने के दावेदारों में ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार और बिग बी अमिताभ बच्चन भी शामिल थे , लेकिन 17 नौकरशाहों की कमिटी ने दोनों को इस लायक नहीं समझा। दोनों के नाम 37 दावेदारों की पहली लिस्ट में थे। बाद में कमिटी ने 20 लोगों की एक दूसरी लिस्ट बनाकर सरकार के पास भेजी , जिसमें अमिताभ और दिलीप कुमार के नाम नहीं थे। आखिर में दिवंगत संगीतकार-गायक भूपेन हजारिका और दिवंगत कार्टूनिस्ट व पेंटर मारियो मिरांडा समेत 5 लोगों को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

दिल्ली से छपने वाले एक टैब्लॉइड के मुताबिक आरटीआई ऐक्टिविस्ट सुभाष चंद अग्रवाल द्वारा फाइल की गई आरटीआई के जवाब में गृह मंत्रालय की ओर से यह जानकारी दी गई है।

पद्म विभूषण , भारत रत्न के बाद देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। पद्म विभूषण पाने के लिए सबसे पहली योग्यता यह होनी चाहिए कि जिसे सम्मान मिलना है , उसे पांच साल पहले तक कोई पद्म सम्मान न मिला हो। इस नाते दोनों महान ऐक्टर पद्म विभूषण के लिए पूरी तरह योग्य थे , क्योंकि दिलीप कुमार को 1991 में और अमिताभ को 2001 में पद्म अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

अवॉर्ड विजेताओं का नाम फाइनल करने वाली कमिटी में शामिल नौकरशाहों की नज़र में शायद अमिताभ और दिलीप कुमार उतने ' योग्य ' नहीं थे , जितने इससे पहले इस अवॉर्ड्स को पाने वाले। खास बात यह है कि अगर आप पूर्व के सालों में पद्म विभूषण पाने वालों की लिस्ट देखें तो आपको हैरानी होगी कि क्या ये दोनों महान कलाकार उन लोगों से कैसे कमतर हैं ? पिछले कुछ सालों में जिन लोगों को पद्म विभूषण मिला है उनमें योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया , पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बृजेश मिश्र (2011) , शिपिंग कॉरपोरेशन के पूर्व सीईओ चंद्रिका प्रसाद श्रीवास्तव (2009) , जम्मू-कश्मीर के गवर्नर एन.एन. वोहरा (2007)।

गौरतलब है कि 89 साल के दिलीप कुमार को पाकिस्तान देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान- निशान-ए-इम्तियाज़ से 1997 में नवाज़ चुका है और अमिताभ बच्चन को फ्रांस सरकार ने 2007 में अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान- लीजन ऑफ़ ऑनर से सम्मानित किया था। लेकिन भारतीय अधिकारियों की नज़र में ये लोग पद्म विभूषण के भी काबिल नहीं हैं।

मजेदार बात यह है कि आरटीआई ऐक्टिविस्ट सुभाष चंद अग्रवाल की याचिका के जवाब में गृह मंत्रालय ने कहा है कि इन अवॉर्ड्स के लिए नाम फाइनल करने वाली सर्च कमिटी ने दो बार (27 अक्टूबर , 11 नवंबर ) बैठक की थी , लेकिन उन दोनों मीटिंग्स के मिनट्स नहीं लिए गए थे। इसलिए उन बैठकों में क्या हुआ इसका कोई रेकॉर्ड नहीं है। गृह मंत्रालय के सचिव (बॉर्डर सिक्यूरिटी) ए.ई. अहमद की अध्यक्षता में सर्च कमिटी में 16 अन्य अलग-अलग मंत्रालयों से जुड़े टॉप नौकरशाह शामिल थे।