ईरानी परमाणु बम का खतरा

Hits: 60 smaller text tool iconmedium text tool iconlarger text tool icon

iiranईरान ने अपने परमाणु रिएक्टर में स्वदेशी परमाणु ईंधन रॉड डालने का दावा करके पश्चिम एशिया में पहले से ही व्याप्त राजनीतिक तनाव को और हवा दे दी है और कच्चे तेल की कीमतों में आग लगा दी है। ईरान की ओर से दावा किया गया है कि रिएक्टर में डाली गई परमाणु ईंधन रॉड में 20 प्रतिशत संवर्द्धित यूरेनियम का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि यूरेनियम का इतना संवर्द्धन परमाणु बम बनाने के लिए अपर्याप्त है, पर इसे उस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति तो माना ही जाएगा। ईरान के ताजा दावे में आत्म-संतुष्टि और दर्प, दोनों ही भाव शामिल हैं, तो उसकी प्रतिक्रिया में अमेरिका और इस्राइल ने अपनी दादागीरी दर्शाने की कोशिश की है। अफगानिस्तान और इराक में पहले ही हाथ जला चुका अमेरिका अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के नाम पर ईरान की घेराबंदी करने में विश्व बिरादरी का समर्थन हासिल करने की जुगत भी कर रहा है, पर यह तय है कि वह जल्दबाजी में कोई कदम उठाने की हिमाकत नहीं करेगा। इसकी दो वजहें हैं। पहली, ईरान के अंदरूनी हालात अफगानिस्तान और इराक जैसे नहीं हैं, जहां केंद्रीय सत्ताएं पहले से बहुत कमजोर थीं और जिन्हें घरेलू मोरचे पर गंभीर चुनौतियों से जूझना पड़ रहा था। दूसरी बात, ईरान दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है। वहां युद्ध की नौबत आने पर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर उसका नकारात्मक प्रभाव पड़ना तय है।

वैश्विक मंदी के मौजूदा दौर में अमेरिका या यूरोप के प्रमुख देशों में से कोई भी यह जोखिम नहीं लेना चाहेगा। लेकिन ईरान के दावे और उस पर अमेरिका-इस्राइल की प्रतिक्रियाओं से परे एक समस्या और है। वह यह कि ईरान का परमाणु बम बनाने पर अड़ना मुसलिम कट्टरपंथ के उभार के मौजूदा दौर में विश्व शांति के लिए एक गंभीर खतरा है। गौरतलब है कि पिछली सदी के उत्तरार्द्ध में मुसलिम कट्टरपंथ की शुरुआत ईरान से ही हुई थी। वहां के सत्ता प्रतिष्ठान में शिया धार्मिक नेता आयतुल्ला खमेनी की हैसियत राष्ट्रपति अहमदीनेजाद से कहीं ऊपर है। ऐसे हालात में ईरान के परमाणु शक्ति संपन्न होने से मुसलिम कट्टरवाद को बढ़ावा मिलना लाजिमी है। यह स्थिति मुसलिम कट्टरवाद के नाना रूपों का दंश झेल रहे दुनिया के तमाम देशों के लिए चिंताजनक होगी।

ऐसे में विश्व बिरादरी के समक्ष एक बड़ी चुनौती है कि वह ईरान पर नैतिक दबाव बनाकर उसे परमाणु बम बनाने से रोके। साथ ही यह जिम्मेदारी भी बनती है कि उसके परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के अधिकार पर गैर-जरूरी रोक-टोक नहीं करे।