जो लोग इंटरनेट और सूचना प्रौद्योगिकी के दूसरे माध्यमों पर किसी किस्म के नियंत्रण के पक्ष में हैं, उनके लिए ट्विटर पर एक अच्छी खबर है। माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने घोषणा की है कि उसने ऐसी तकनीक विकसित कर ली है, जिसके सहारे किसी ट्विट को किसी देश में पहुंचने से रोका जा सकता है। अभी उसने इस तकनीक का इस्तेमाल शुरू नहीं किया है, लेकिन उसका मानना है कि अगर उसे ज्यादा से ज्यादा देशों में अपनी पहुंच बढ़ानी है, तो उसे ऐसे किसी नियंत्रण की तकनीक की जरूरत रहेगी। अब तक उसके पास ऐसा कोई उपाय नहीं था कि वह किसी देश विशेiष networking में किसी ट्विट का प्रसारण रोक सके, अगर उन्हें रोकना होता है, तो उस ट्विट को साइट से ही उड़ाना होता है।
ट्विटर का इस्तेमाल अक्सर तानाशाही वाले देशों में सरकार विरोधी सूचना और विचार को फैलाने के लिए किया जाता है। अरब देशों में पिछले दिनों भड़के विद्रोह में ऐसी साइट्स ने बड़ी भूमिका अदा की। चीन जैसे कुछ देशों में ट्विटर पर प्रतिबंध है। इसके बरक्स गूगल और फेसबुक का कहना है कि उन पर आने वाली सामग्री पर नियंत्रण उनके लिए असंभव है। इस सिलसिले में दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक मामले में इन साइट्स के कर्ताधर्ताओं को अपना पक्ष रखना है। इन लोगों का कहना है कि वेब को सेंसर करना संभव नहीं है।
वेब की राष्ट्रीय सीमाएं नहीं होतीं और पूरी दुनिया के लोगों को अपनी बात अभिव्यक्त करने से रोका नहीं जा सकता।ट्विटर ने जो घोषणा की है, उसके मुताबिक भी साइट पर जाने से पहले किसी सामग्री की जांच करना मुमकिन नहीं होगा। लगभग 25 करोड़ ट्विट रोजाना ट्विटर पर आते हैं और इतनी बड़ी संख्या में आने वाली सामग्री की निगरानी करना व्यावहारिक रूप से नामुमकिन है। ज्यादा से ज्यादा यह हो सकता है कि शिकायत आने के बाद किसी सामग्री को हटा दिया जाए। वैसे भी सूचना प्रौद्योगिकी इतनी तरक्की कर चुकी है और कर रही है कि किसी भी चीज को रोकना असंभव है। इंटरनेट पर ही ऐसी जानकारियां भरी पड़ी हैं, जो यह बताती है कि प्रतिबंधों का उल्लंघन कैसे किया जाए।इस समस्या के तीन पहलू हैं। पहला यह है कि सूचना साधन इतने ताकतवर हो गए हैं कि कोई इनकी उपेक्षा नहीं कर सकता।
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से लेकर भारतीय प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह तक ट्विटर पर हैं। दूसरा पहलू यह है कि इन साइट्स पर आने वाली ज्यादातर सामग्रियां निर्थक और बेकार हैं। ज्यादातर लोग अपने बाल कटवाने से लेकर प्रेम शुरू होने और प्रेम टूटने तक की एक-एक बात इन साइट्स पर डालते रहते हैं। ये साइट्स एक अजीब किस्म की प्रदर्शनप्रियता से भरी होती हैं। तरह-तरह के सेलेब्रिटी इन साइट्स पर सबसे ज्यादा लोकप्रिय होते हैं और वे अपना प्रचार करने या वस्तुओं का विज्ञापन करने के लिए उन्हें इस्तेमाल करते हैं। समाज में हर तरह की प्रवृत्तियां हैं और सारी इस आभासी दुनिया में दिखती हैं। तीसरा पहलू यह है कि सूचना प्रौद्योगिकी के युग में सेंसरशिप तकरीबन असंभव है।मसलन, सलमान रुश्दी की सैटेनिक वर्सेज भारत में प्रतिबंधित है, लेकिन उसे नेट से आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है। दरअसल सेंसरशिप के मूल में किसी क्षेत्र की सीमाओं में राजनीतिक या प्रशासनिक अधिकार हैं, लेकिन इस आभासी दुनिया में राष्ट्रों की सीमाएं बेकार हो जाती हैं। नेट पर फैली अपसंस्कृति सचमुच अप्रिय है, लेकिन नेट पर बहुत सारी अच्छी चीजें भी हैं। अपसंस्कृति को सीमित करने और अच्छी चीजों की रक्षा करने के उपाय सांस्कृतिक ही हो सकते हैं, ट्विटर की नई तकनीक भी इसमें बहुत दूर तक काम नहीं आएगी।


