यूपी विधानसभा के पांचवें दौर के मतदान से एक दिन पहले ही बसपा सरकार को लोकायुक्त ने एक और करारा झटका दिया है। सूबे के लोकायुक्त ने मायावती के बेहद खास और 15 विभागों के कबीना मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी व उनकी विधायक पत्नी हुस्ना को आय से अधिक संपत्तिजमा करने और मनी लांड्रिंग का जिम्मेदार ठहराया है।
लोकायुक्त ने 929 पेज की जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री को भेजने के साथ ही सिद्दीकी दंपति के खिलाफ सीबीआई या प्रवर्तन निदेशालय से जांच की संस्तुति भी की है। लोकायुक्त की सिफारिश पर मुख्यमंत्री मायावती अब तक करीब डेढ़ दर्जन मंत्रियों को बर्खास्त कर चुकी हैं।
लेकिन मायावती नसीमुद्दीन को लेकर धर्मसंकट में पड़ गई हैं। हालांकि सरकार ने सिफारिशें न मिलने का हवाला देकर मामले से पल्ला झाड़ने की कोशिश की है। बताया जाता है कि पश्चिम यूपी की 128 सीटों के चुनाव के मद्देनजर विधिक राय की आड़ लेकर मामले को टालने की तैयारी है।
लोकायुक्त न्यायमूर्ति एन.के. मेहरोत्रा ने बताया कि नौ दिसंबर 2011 को जगदीश नारायन शुक्ला ने सिद्दीकी दंपति के खिलाफ आय से अधिक संपत्तिअर्जित करने समेत कई शिकायतें की थी, जो जाच में सही पायी गईं। लोकायुक्त ने कहा, हुस्ना के नाम बाराबंकी, लखनऊ व बांदा में संपत्तिहैं। नसीमुद्दीन ने जिन बेनामी संपत्तिमें धन लगाया है वह उनकी आय के ज्ञात स्त्रोत से अधिक लगती है।
आयकर रिटर्न के मुताबिक, हुस्ना ने चार साल में अपनी आय एक करोड़ 20 लाख तथा नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपनी आमदनी 73 लाख 14 हजार रुपए बताई है। जबकि दोनों की जिन संपत्तिायों का मूल्याकन संबंधित विभागों से कराया गया है वे ही न्यूनतम 50 करोड़ रुपये की हैं। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, हुस्ना ने काली कमाई से क्यू एफ एजूकेशनल सोसाइटी गठित कर कम दामों पर जमीन खरीदी।
सोसाइटी की बैलेंसशीट में पूंजी तथा अन्य अनुदान पर तीन करोड़ 62 लाख से ज्यादा की धनराशि दिखाई गई है। जबकि आयकर विभाग की जाच में एक करोड़ 82 लाख का जिक्र मिला है। सोसाइटी के नाम पर बाराबंकी में 46 लाख में 57.18 बीघा जमीन खरीदी गई है जिसकी कीमत 16 करोड़ 39 लाख से भी ज्यादा है।
हुस्ना ने लखनऊ के छावनी क्षेत्र में मीरा चौहान नामक महिला से 16 हजार वर्ग मीटर से ज्यादा क्षेत्र में बना बंगला मात्र 50 लाख में खरीदा है। सर्किल रेट के हिसाब से बंगले के ढांचे की कीमत ही करीब एक करोड़ रुपए है। लोकायुक्त ने बुंदेलखंड क्षेत्र विकास पैकेज के तहत अनुदान वितरण की प्रक्त्रिया पर सवाल उठाया है। लोकायुक्त ने कहा है कि मंत्री इसके लिए सीधे लाभ के जिम्मेदार तो नहीं है लेकिन उन्होंने अपने दायित्व का सही ढंग से निर्वाह नहीं किया।


