दिल्ली के रामलीला मैदान में योग गुरु बाबा रामदेव और उनके समर्थकों के खिलाफ पिछले साल 4-5 जून की आधी रात को दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट आज फैसला सुना सकती है। भ्रष्टाचार विरोधी अनशन के दौरान पुलिस ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से संबंधित मीडिया रिपोर्टों के आधार पर संज्ञान लिया था जिसमें बताया गया था कि दिल्ली पुलिस ने रामदेव के सोते हुए समर्थकों के खिलाफ बर्बर तरीके से कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान घायल एक महिला समर्थक राजबाला की बाद में मौत भी हो गई थी। जस्टिस बीएस चौहान और जस्टिस स्वतंत्र कुमार की बेंच ने 20 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
इससे पहले नवंबर 2011 में इस प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली पुलिस से इस बात का जवाब मांगा था कि रामलीला मैदान में कार्रवाई के लिए सुबह तक इंतजार क्यों नहीं किया गया? न्यायमूर्ति बीएस चौहान और न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की पीठ ने कहा थी कि दिल्ली पुलिस स्पष्ट करे कि क्या बल प्रयोग न्यायोचित था। किन परिस्थितियों में कार्रवाई हुई और पुलिस लोगों से स्थान छोड़ने के लिए कहने के लिहाज से सुबह तक इंतजार क्यों नहीं कर सकी?


