आतंक के ख़िलाफ़ काम करने के लिए गठित की जाने वाली केंद्रीय संस्था एनसीटीसी को लेकर विपक्ष के बढ़ते हमलों के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसका विरोध करने वाले मुख्यमंत्रियों में से सात को चिट्ठी लिखी है.
इस पत्र में मनमोहन सिंह ने मुख्यमंत्रियों की चिंता के बारे में आश्वासन दिया है कि केंद्र सरकार की मंशा संविधान की ओर से राज्य और केंद्र सरकार को दिए गए अधिकारों को प्रभावित करने का नहीं है.
उधर विपक्षी दलों ने संसद की गृह मामलों की समिति से अनुरोध किया है वह इस मामले में हस्तक्षेप करे और केंद्र सरकार को इस पर अमल से रोके.
माना जाता है कि एनसीटीसी का गठन केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम की योजना थी और जैसा कि सरकार की घोषणा में कहा गया है, एनसीटीसी को पहली मार्च से कामकाज शुरु करना है.
अब तक कम से कम 12 मुख्यमंत्री सार्वजनिक रुप से इसका विरोध कर चुके हैं. उनका कहना है कि केंद्र सरकार के एकतरफ़ा निर्णय से गठित होने वाले इस केंद्र से संघीय ढाँचे में राज्यों के अधिकारों का हनन होगा.
विरोध करने वालों में यूपीए में शामिल तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी भी शामिल हैं. मंगलवार को यूपीए गठबंधन की एक और पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और भारतीय राज्य जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री के बयान से संकेत मिल गए हैं कि वो भी इससे खुश नहीं हैं.
बचाव की कवायद
वैसे केंद्र सरकार कह चुकी है कि केंद्र की मंशा राज्यों के मामले में दखल देने की नहीं है. अब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सात मुख्यमंत्रियों को नेशनल एंटी टेररिज्म सेंटर (एनसीटीसी) के बारे में पत्र लिखकर समझाने का प्रयास किया है.
जिन सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों को मनमोहन सिंह ने पत्र लिखा है, उनमें ओडिशा, गुजरात, पश्चिम बंगाल, बिहार, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री शामिल हैं.
इन सातों मुख्यमंत्रियों ने ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर कहा था कि वे एनसीटीसी के गठन का आदेश वापस ले लें.
हालांकि इसका विरोध करने वाले मुख्यमंत्रियों की संख्या 12 हो चुकी है और अब इसमें उमर अब्दुल्ला को भी गिना जा रहा है क्योंकि मंगलवार को अपने बयान में उन्होंने ये नहीं कहा कि वे इसका समर्थन करते हैं और कहा कि वे अपनी बात सीधे सरकार से कहेंगे.
प्रधानमंत्री कार्यालय ने मनमोहन सिंह के पत्र को सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर भी जारी कर दिया है जिससे कि आम लोगों तक भी ये संदेश पहुँचाया जा सके.
समाचार एजेंसी पीटीआई का कहना है कि केंद्रीय गृहमंत्री चिदंबरम ने प्रधानमंत्री को इस बारे में महत्वपूर्ण बिंदुओं के बारे में बताया था.
सरकार योजना बना रही है कि पहली मार्च को एनसीटीसी के कामकाज शुरु करने से पहले सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों की एक बैठक बुलाई जाए.
इस बीच मंगलवार को गृह मामलों की संसदीय समिति की बैठक में सदस्यों ने गृह सचिव से पूछा है कि क्यों सरकार ने राज्यों को विश्वास में लिए बिना एनसीटीसी के गठन की घोषणा की.
समाचार एजेंसी का कहना है कि अब विपक्षी दल चाहते हैं कि इस संसदीय समिति के प्रमुख वेंकैया नायडू एनसीटीसी को रोकने लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाए.


