केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने 67 कविताओं की एक किताब ' माई वर्ल्ड विदइन ' लिखी है। ये कविताएं उन्होंने यात्रा करते वक्त या दूसरी जिम्मेदारियों से समय निकालकर अपने मोबाइल पर लिखीं। ' फिसाइल लेफ्ट ' (विखंडनीय वाम) नामक कविता में उन्होंने लेफ्ट दलों पर हमला किया है और उन्हें अपनी विचारधारा पर दोबारा काम करने की सलाह दी है-
वाम हुआ है ग्रस्त
हमेशा के लिए
एक बीमारी से
वे नहीं कर सकते निदान,
लक्षणों का, हालांकि
उनके लिए सबसे परेशानी की बात
है यह कि वह
देख नहीं पाते अपनी नाक से आगे..।।
वकील से नेता बने सिब्बल ने कहा कि उनके पीछे कोई प्रेरक शक्ति नहीं है, लेकिन कुछ हद तक उनके इर्द-गिर्द के घटनाक्रमों ने उन्हें कवि बना दिया। उनकी कविताएं 'द बाजार ऑफ पॉलिटिक्स'' और 'फिसाइल लेफ्ट' राजनीति की निन्दा करती हैं। इसके साथ ही सिब्बल ने समकालीन राजनीति, वैश्विक अर्थव्यवस्था, आतंकवादियों के परेशान दिमाग और वंचितों तथा दलितों की चिंताओं को भी अपनी कविताओं में उकेरा है। उन्होंने कहा, 'किताब वर्तमान के बारे में है। जब दुनिया संक्रमणकालीन परिवर्तनो से गुजर रही है। ग्लोबल इकॉनमी निराशाजनक है, आतंकी हमले हैं, राजनीति में हलचल है। यह संक्रमणकालीन विश्व में भारत की यात्रा की ओर देख रही है।'
उन्होंने कहा कि 2008 में मुम्बई पर हुए आतंकी हमलों से उनका गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने स्वत: ही एक आतंकवादी पर अपने भावों को एक कविता के रूप में उड़ेल दिया। यह पूछे जाने पर कि क्या कोई आतंकवादी कविता का हकदार है, सिब्बल ने कहा, 'नि:संदेह।' उनकी यह कविता उस आतंकवादी की भावनाओं को बताती है जो पुलिस की जवाबी गोलीबारी में निर्दोष लोगों के साथ मुम्बई के ताज होटेल में फंस जाता है।
' प्रेजुडिस' नाम की कविता में सिब्बल ने अनिश्चित दुनिया में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के एक सदस्य के भय के बारे में लिखा है। उन्होंने कहा, 'यह स्थान शायद गुजरात हो सकता है।'
एक दूसरी कविता 'वॉट डू आई वॉन्ट गॉड टु बी' में सिब्बल ने कहा है कि वह भगवान से नाराज हैं क्योंकि उनका मानना है कि ईश्वर ने बहुत ही अन्यायपूर्ण दुनिया बनाई है। ' एम्पावरमेंट' शीर्षक वाली कविता में भी सर्वशक्तिमान के प्रति उनका गुस्सा झलकता है जो दलितों और सशक्तीकरण की ओर उनकी यात्रा के बारे में बात करती है।
सिब्बल ने प्रेम और प्रकृति जैसे विषयों को भी जगह दी है। उनका कहना है कि प्रत्येक बदसूरत में उन्हें खूबसूरती दिखाई देती है। उनके इस कविता संग्रह की कीमत 295 रुपये है। इससे पहले 2008 में उनका पहला कविता संग्रह 'आई विटनेस: पार्शल ऑब्जर्वेशंस' भी आ चुका है। सिब्बल ने संकेत दिया कि जल्द ही उनकी एक और किताब आएगी।


