‘सोशल साइटों से 1 मार्च तक मांगी रिपोर्ट’

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Social sitesसोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पर कंटेट के मसले पर अदालत ने नेटवर्किंग साइट से 15 दिनों के लिखित जवाब दाखिल करने का को कहा है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने इन कंपनियों से 1 मार्च तक रिपोर्ट पेश करने को कहा है ।

इस बीच सोमवार को फेसबुक इंडिया ने दिल्ली की एक अदालत को वेबसाइट से आपत्ति जनक सामग्री हटाने संबंधी उसके आदेश के अनुपालन से संबंधित रिपोर्ट दी। अदालत ने फेसबुक तथा 21 अन्य वेबसाइट को आपत्तिजनक सामग्री हटाने के निर्देश दिए थे।

गूगल इंडिया ने भी अदालत से कहा कि उसने नेट पर अपनी ‘साइटों’ पर से उन पृष्ठों को हटा दिया है जिसको लेकर याचिकाकर्ताओं ने आपत्ति जताई थी।

इस बीच, फेसबुक, याहू तथा माइक्रोसाफ्ट ने अदालत से कहा कि इस मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं है और इस सिलसिले में उनके खिलाफ कार्रवाई करने का कोई औचित्य नहीं है। अतिरिक्त न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने याचिकाकर्ता मुफ्ती एजाज अरशद काजमी की तरफ से मामले में पेश वकील से यह पूछा कि क्या ब्लाग पर किसी व्यक्ति द्वारा कोई सामग्री या सूचना पोस्ट किए जाने से सेवा प्रदाता कंपनियों को पक्ष बनाया जा सकता है।

अदालत ने गूगल से यह भी पूछा कि वह ‘उपयुक्त’ तरीके से जवाब के साथ क्यों नहीं आई। अदालत ने कंपनी की इस दलील को खारिज कर दिया कि उसे फैसले तथा मामले से जुड़े अन्य दस्तावेज की प्रति शुक्रवार को मिली थी। अदालत ने कहा, ‘आप यह मत कहिए कि आपको दस्तावेज की प्रति शुक्रवार को मिली। इस मामले में पिछले कुछ महीने से होहल्ला हो रहा है, ऐसे में आपको इसके लिए तैयार रहना चाहिए था।

अदालत ने याचिकाकर्ता से उन सभी दस्तावेज की प्रति प्रतिवादियों को उपलब्ध कराने को कहा जिसके आधार पर उन्होंने अर्जी दयार की है। इससे पहले, अदालत ने 20 दिसंबर को आदेश जारी कर 21 वेबसाइट को सम्मन भेजा और फोटोग्राफ्स, वीडियो या अन्य रूप में मौजूदा ‘धर्म एवं समाज विरोधी’ सामग्रियों को हटाने का निर्देश दिया था।

जिन वेबासाइटों को आपत्तिजनक सामग्री हटाने का निर्देश दिया गया था, उनमें फेसबुक इंडिया, फेसबुक, गूगल इंडिया प्राइवेट लि., गूगल आकरुट, यूट्यूब, ब्लागस्पाट, माइक्रोसाफ्ट इंडिया प्राइवेट लि., माइक्रोसाफ्ट इंडिया, माइक्रोसाफ्ट जोम्बी टाइम, एक्सबोई, बोर्डरीडर, आईएमसी इंडिया, माई लॉट, शइनी ब्लाग तथा टोपिक्स शामिल हैं।

वहीं गूगल इंडिया ने दिल्ली की अदालत से कहा कि उसने कुछ पृष्ठों को वेबसाइट से हटा दिया है। फेसबुक, याहू तथा माइक्रोसाफ्ट ने अदालत से कहा कि उनके खिलाफ कार्रवाई का कोई कारण नहीं है इसलिए हमारे खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है। इससे पहले मामले में इन कंपनियों पर इंटरनेट पर आपत्तिजनक सामग्री डालने का आरोप है। याहू, गूगूल, यूट्यूब सहित सभी कंपनियों के कथित आपत्तिजनक सामग्री परोसे जाने के कारण इन पर अभियोग चलाने को कहा गया था।