देश भर में अंडरग्रैजुएट लेवल पर साइंस और इंजिनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के लिए प्रस्तावित सिंगल एंट्रेंस टेस्ट इंडियन साइंस ऐंड इंजिनियरिंग एलिजिबिलिटी टेस्ट (आईएसईईटी) पर बुधवार को नई दिल्ली में राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के सम्मेलन में सहमति की मुहर लग गई। इसी के साथ साल 2013 से देश में इंजिनियरिंग के लिए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट की शुरुआत का रास्ता साफ हो गया है। तमिलनाडु को छोड़कर तकरीबन सभी राज्यों ने इस टेस्ट पर अपनी सहमति दिखाई है। हालांकि, मंत्रियों की बैठक में इसे लेकर कुछ चिंताएं और आशंकाएं भी जरूर जाहिर की गईं।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार स्टूडेंट्स के ऊपर से ढेर सारे एग्जाम्स का बोझ कम करने और स्टूडेंट्स को कोचिंग के मकड़जाल से बचाने के लिए इस सिंगल टेस्ट का प्रावधान लाई है। सम्मेलन के दौरान मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने बताया कि केंद्र सरकार बैठक में आए राज्यों के सुझावों के आधार पर इस टेस्ट में कुछ बदलाव कर ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को अगले दो महीनों में पेश कर देगी। फिर उस पर राज्यों की राय लेकर उसके आधार पर फाइनल नोटिफिकेशन निकाला जाएगा।
सरकार की योजना है कि साल 2013 से सभी केंद्रीय संस्थानों में दाखिले के लिए इस प्रक्रिया को अपनाया जाए, जबकि साल 2014 से देशभर के संस्थानों में इसके आधार पर दाखिला दिया जाए।
राज्यों की राय: वैसे तो सिंगल टेस्ट की अवधारणा पर तमिलनाडु को छोड़कर तकरीबन सभी राज्यों ने सहमति दिखाई है। फिर भी बैठक में तमाम राज्यों ने टेस्ट को लेकर तमाम तरह की आशंकाएं जाहिर कीं। तमिलनाडु ने पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि हमने अपने राज्य में एंट्रेंस को खत्म किया है, ऐसे में किसी और टेस्ट के लिए हम सहमत नहीं हैं। मिजोरम व मेघालय जैसे राज्यों ने अपने स्टूडेंट्स को दिए जाने वाले कोटे पर चिंता जताई। यूपी सरकार ने सामान्य ग्रैजुएशन में दाखिले के लिए उच्च स्तरीय टेस्ट को गैर जरूरी करार दिया। यूपी व बिहार जैसे राज्यों की आशंका थी कि आईआईटी स्तर के टेस्ट में पिछडे़ राज्यों के लिए संभावनाएं संकुचित न हो जाएं।
आईएसईईटी का स्वरूप -साइंस और इंजिनियरिंग कोर्सेज में दाखिले के लिए यह टेस्ट मान्य होगा।
-टेस्ट के दायरे में आईआईटी, आईआईआईटी, एनआईटी, आईआईएसईआर, एनआईएसईआर सहित केंद्रीय संस्थान, सभी इंजिनियरिंग कॉलेज, राज्य सरकार के कॉलेज, प्राइवेट कॉलेज, डीम्ड यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी शामिल होंगी।
टेस्ट का पैटर्न: टेस्ट के तीन हिस्से होंगे - 12वीं बोर्ड के मार्क्स के पर्सेंटेज, मेन टेस्ट और अडवांस टेस्ट। इसमें सिर्फ आईआईटी के इच्छुक लोगों को ही अडवांस टेस्ट देना होगा।
मेरिट का आधार: इसमें 12वीं बोर्ड और टेस्ट के आधार पर मेरिट बनेगी। दोनों के बीच का रेश्यो 40:60 तय किया गया है। आईआईटी के लिए प्रस्ताव है कि 12वीं बोर्ड और अडवांस टेस्ट के आधार पर मेरिट तैयार की जाए या फिर 12वीं बोर्ड, मेन और अडवांस दोनों के नंबरों को आधार बनाया जा सकता है। यह प्रतिशत फिलहाल तय होना है।
इसी टेस्ट के मुताबिक राज्यों के लिए एक मेरिट सूची बनेगी, जिसके आधार पर राज्यों के कॉलेजों में दाखिला मिलेगा। राज्यों को छूट दी जाएगी कि वे अपने यहां दाखिले के लिए 12वीं बोर्ड के नंबरों को कितना वेटेज दें।
इस टेस्ट में बैठने के लिए स्टूडेंट का 12वीं पास होना जरूरी है। शुरू में टेस्ट अंग्रेजी और हिंदी होगा, बाद में रीजनल भाषाओं में भी परीक्षा दी जा सकेगी। शुरू में सरकार की योजना साल में दो बार टेस्ट कराने की है। आगे चलकर साल में तीन बार भी हो सकता है। स्टूडेंट एक से अधिक बार इस परीक्षा में बैठ सकता है। टेस्ट का स्कोर एक साल के लिए मान्य होगा।
क्या साइंस और इंजिनियरिंग कोर्सेज के लिए सिंगल एंट्रेंस टेस्ट का निर्णय सही है, इससे विद्यार्थियों पर क्या असर पड़ेगा ?


