वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि हालांकि खाद्य मुद्रास्फीति घटी है लेकिन देश अब भी मुश्किलों से बाहर नहीं आया है और भारतीय अर्थव्यवस्था उच्च वृद्धि दर पर लौटे उससे पहले मुद्रास्फीति का दबाव सहनीय एवं स्वीकार्य स्तर पर लाया जाना जरूरी है।
मुखर्जी ने कहा कि पिछले 20-22 महीनों में खाद्य मुद्रास्फीति असहाय रही है। खाद्य मुद्रास्फीति फरवरी, 2010 तक 22 फीसदी तक पहुंच गई थी। दिसंबर से यह दबाव घटने लगा लेकिन मेरा कहना होगा कि हम पूरी तरह मुश्किलों से बाहर नहीं आए हैं।उन्होंने एक खबरिया चैनल के साथ साक्षात्कार में कहा कि इसे (मुद्रास्फीति) सहनीय एवं स्वीकार्य स्तर पर लाया जाना जरूरी है।
यह कठिन काम है लेकिन यह वित्त मंत्री और भारत सरकार की जिम्मेदारी है। मुखर्जी के अनुसार, मुद्रास्फीति का उच्च दबाव देश की आर्थिक वृद्धि दर को प्रभावित कर रहा है और इस साल इसके सात फीसदी रहने की संभावना है।मुखर्जी ने कहा कि पहली दो तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.3 फीसदी है। मुझे नहीं लगता है कि शेष तिमाहियों में उसमें कोई उल्लेखनीय सुधार आएगा।
शायद हमें सात फीसदी जीडीपी वृद्धि दर पर संतोष करना पड़ सकता है।ब्रिटेन की कंपनी वोडाफोन को 11000 करोड़ रुपये आयकर देने के बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय द्वारा खारिज कर दिए जाने पर उन्होंने कहा कि हम इस बात पर गौर कर रहे हैं कि सरकार राजस्व विभाग के हितों तथा विदेशी निवेशकों के विश्वास की रक्षा के लिए क्या कर सकती है।
सरकार एक उपुयक्त फैसला करेगी।2जी मामले में केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदम्बरम को क्लीन चिट मिलने पर वित्त मंत्री ने कहा कि मैं पहले ही निचली अदालत के फैसले का स्वागत कर चुका हूं। अब स्वामी को इससे संतुष्ट हो जाना चाहिए। कम से एक समस्या का हल हो गया है।
लोकपाल विधेयक और बहुब्रांड खुदरा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मुद्दे पर राजनीतिक आम सहमति की कमी पर मुखर्जी ने कहा कि भाजपा एवं अन्य राजनीतिक दलों को विनाशकारी भूमिका नहीं बल्कि रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभानी चाहिए।


