किंगफिशर को नोटिस, राहत पैकेज नहीं देगी सरकार

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Kingfisher notice, the government stimulus package will notविमानन क्षेत्र के नियामक डीजीसीए ने किंगफिशर एयरलाइंस के मुख्य कार्यकारी और शीर्ष अधिकारियों को बुलाकर एयरलांइस की बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द होने के बारे में पूरा ब्यौरा मांगा है। इधर सरकार ने कंपनी को किसी तरह का राहत पैकेज देने से इनकार कर दिया।
   
नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने विमानन कंपनियों के मुख्य कार्यकारी संजय अग्रवाल समेत वरिष्ठ अधिकारियों से उड़ानें रद्द होने के संबंध में सफाई देने के लिए कहा है।
    
आज 20 से ज्यादा उड़ानें रद्द की गईं। कल छह बड़े शहरों से उड़रने वाली करीब 80 उड़ाने रद्द हुईं जिससे सैंकड़ों यात्रियों को परेशानी हुई। नकदी संकट से जूझ रही विमानन कंपनी शुक्रवार रात से रद्द विमानों की संख्या के बारे में भी कल शाम तक डीजीसीए को सूचित नहीं कर सकी।
   
नागर विमानन मंत्री अजित सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सरकार विमानन कंपनी को राहत पैकेज नहीं देगी। मंत्री ने संवाददाताओं से कहा कोई भी सरकार राहत पैकेज नहीं देगी। सरकार इसके लिए बैंक या निजी उद्योग से कुछ नहीं कहेगी।
   
सिंह ने कहा हाल ही में सरकार ने उनके बैंक खाते भी जब्त कर लिए। इसलिए हमारी पहली चिंता मौजूदा उड़ानों में सवारियों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो और फिर देखते हैं वे क्या जवाब देते हैं। डीजीसीए इसकी जांच कर रही हैं।
   
उन्होंने कहा कि किंगफिशर के सामने कई तरह की वित्तीय मुश्किलें हैं। सिंह ने कहा कि कोलकाता में कर्मचारी हड़ताल पर चले गए क्योंकि कंपनी ने उन्हें कई महीनों से वेतन नहीं दिया। इसलिए उड़ानें रद्द कर दी गईं।
    
डीजीसीए का काम है यह देखना कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो। किंगफिशर बैंकों के साथ बातचीत कर रही है और उसने अपनी कारोबारी योजना पेश की है। सिंह ने कहा कि सरकार ने हाल ही में कुछ बदलाव किए हैं जिनमें विमानन ईंधन नीति संबंधी परिवर्तन भी शामिल हैं। इस नीति के तहत कंपनी सीधे तौर पर जेट ईंधन का आयात कर सकती है।
    
मंत्री ने कहा कि किंगफिशर की कारोबारी योजना इस लिहाज से व्यावहारिक हो सकती है लेकिन यह बैंकों को तय करना है कि कितना धन दिया जाए। डीजीसीए प्रमुख ई़क़े भारत भूषण ने कहा हमें बड़े पैमाने पर उड़ानों के रद्द होने की खबर लगी। अपनी उड़ानों के रद्द होने के बारे में उन्हें हमें सूचित करना होता है। लेकिन कंपनी ने ऐसा नहीं किया।