दिल्ली समेत कई मंडलों ने नई ट्रेनों का विरोध किया

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Chambers opposed the new trains, including Delhiकई रेल मंडलों (डिविजन) ने नई ट्रेनों को चलाने का विरोध किया है। इन रेल मंडलों में सबसे आगे नॉर्दर्न रेलवे का दिल्ली डिविजन है। वह नहीं चाहता कि अगले रेल बजट में दिल्ली से नई ट्रेनों को चलाने का एलान किया जाए। सेफ्टी के मामलों पर अनिल काकोदकर की अध्यक्षता वाली हाई पावर्ड कमिटी के सामने प्रेजेंटेशन में दिल्ली डिविजन ने कहा कि यहां स्टेशनों पर इन्फ्रास्ट्रक्चर और कर्मचारियों की जबर्दस्त कमी है। ट्रेनों की संख्या बढ़ाने से उन्हें टाइम पर चलाने और सेफ्टी में दिक्कतें आ सकती हैं।

रेल बोर्ड के सूत्रों ने भी संकेत दिया कि कुछ और व्यस्त मंडल अपने क्षेत्रों में नई ट्रेनों की पेशकश के खिलाफ है, हालांकि उन पर नई ट्रेनें चलाने का राजनीतिक दबाव है।

दिल्ली डिविजन देश के सबसे बिजी डिविजन में से है। इस वक्त यह रोजाना करीब एक हजार ट्रेनों को हैंडल करता है। नॉर्दर्न रेलवे के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, पिछले पांच साल में करीब सौ नई ट्रेनों की जिम्मेदारी दिल्ली डिविजन को मिली है। लेकिन न तो कर्मचारियों की तादाद बढ़ी, न ही कोई बड़ा इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार हुआ। आनंद विहार रेलवे स्टेशन शुरू हुआ लेकिन वहां महज तीन प्लैटफॉर्म हैं। इसी तरह नई दिल्ली स्टेशन पर चार नए प्लैटफॉर्म ही बने। पटरियों की क्षमता सीमित है। नॉर्दर्न रेलवे में कुछ हिस्से ऐसे हैं, जहां हर तीन मिनट में ट्रेन गुजरती है। ऐसे में ऐक्सिडेंट का खतरा रहता है।

नॉर्दर्न रेलवे मेंस यूनियन के अध्यक्ष हरभजन सिंह सिद्दू ने कहा कि यहां 1996 से भर्तियां बंद हैं। कर्मचारी रिटायर होते जा रहे हैं। ऐसे में ट्रेनें बढ़ती रहीं तो उनकी सेफ्टी और मेनटिनेंस में मुश्किलें आएंगी।