सब्जियों के सस्ता होने से खाद्य मुद्रास्फीति लगातार चाथे सप्ताह शून्य से नीचे बनी रही। 14 जनवरी को समाप्त सप्ताह में यह और घट कर शून्य से 1.03 प्रतिशत नीचे रही।
थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति इससे पिछले सप्ताह शून्य से 0.42 प्रतिशत नीचे थी। पिछले साल इसी दौरान कीमत स्तर बहुत उपर चला गया था और खाद्य मुद्रास्फीति 17 प्रतिशत थी।
शु्क्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, आलोच्य सप्ताह के दौरान सालाना आधार पर प्याज 79.10 प्रतिशत सस्ता हुआ, वहीं आलू की कीमतें 22.46 फीसदी नीचे थीं। गेहूं के दाम भी 3.37 प्रतिशत घटे। कुल मिलाकर सालाना आधार पर सब्जियां 47.06 फीसदी सस्ती रहीं।
हालांकि अन्य इस दौरान कतिपय खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़े हैं जिनमें प्रोटीन की प्रचुरता वाले उत्पाद जैसे दल, दूध, मांस अंडा और मछली प्रमुख हैं।
आलोच्य सप्ताह में दालें पिछले साल से 12.77 प्रतिशत महंगी थीं, वहीं दूध के दाम 12.25 प्रतिशत, अंडा, मांस और मछली के 20.33 फीसदी उंचे थे। इसी तरह फलों के दामों में भी सालाना आधार पर 5.17 प्रतिशत की बढ़त रही। अनाज 2.71 प्रतिशत महंगा था। कुल प्राथमिक उत्पादों की श्रेणी में 14 जनवरी को समाप्त सप्ताह में महंगाई की दर 1.89 प्रतिशत रही। इससे पिछले सप्ताह यह 2.47 फीसदी थी। थोक मूल्य सूचकांक में प्राथमिक उत्पादों का हिस्सा 20 प्रतिशत से अधिक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मुद्रास्फीति में गिरावट के बाद अब भारतीय रिजर्व बैंक निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती पर विचार कर सकता है। खाद्य मुद्रास्फीति में गिरावट के साथ साथ दिसंबर, 2011 में सकल मुद्रास्फीति भी साढे सात प्रतिशत से नीचे आ गयी थी।
समीक्षाधीन सप्ताह में गैर खाद्य प्राथमिक उत्पादों (सूत और तिलहन) की मुद्रास्फीति 0.56 प्रतिशत रही, जो इससे पिछले सप्ताह 1.84 फीसदी थी। ईंधन और बिजली की महंगाई दर इस दौरान 14.45 प्रतिशत पर कायम रही।
दिसंबर माह में कुल मुद्रास्फीति घटकर 7.47 प्रतिशत पर आ गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि कुल महंगाई की दर और खाद्य मुद्रास्फीति दोनों के नीचे आने के बाद रिजर्व बैंक निकट भविष्य में अपने मौद्रिक रुख को कुछ नरम करने पर विचार कर सकता है।हालांकि मौद्रिक समीक्षा में केंद्रीय बैंक ने कहा है कि महंगाई चिंता का विषय बनी हुई है क्यों कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बरकरार है तथा सरकार के खर्चे आमदानी की तुलना में अनुमान से अधिक बढ रहे हैं।


