प्रोफेशनल हो मैनेजमेंट तो रिटर्न मिले टनाटन

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Professional management are met, then returnsठंडे मार्केट में भी कुछ कंपनियों ने शानदार रिटर्न दिया है।ये वो कंपनियां हैं, जिनमें विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी प्रमोटर्स से ज्यादा है। 2008 के बाद से इन कंपनियों का परफॉर्मेंस बेंचमार्क इंडेक्स से अच्छा रहा है। ईटी की एक स्टडी से इस ट्रेंड का पता चला है।

विदेशी निवेशकों के दबदबे वाले 25 स्टॉक के इंडेक्स ने 2008 से करीब 26 फीसदी रिटर्न दिया है। इस दौरान सेंसेक्स 13 फीसदी गिरा। इस इंडेक्स में एचडीएफसी बैंक, इंफोसिस टेक्नोलॉजीज, आईटीसी और एलएंडटी जैसे नाम शामिल हैं। रेलिगेयर कैपिटल मार्केट्स के एमडी और इक्विटी हेड (इंडिया) गौतम त्रिवेदी ने बताया, 'कॉरपोरेट इंडिया के लिए मैसेज साफ है। एफआईआई क्वालिटी और बेहतर कॉरपोरेट गर्वनेंस के लिए ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार हैं।'

उनके मुताबिक, किसी भी विदेशी निवेशक को एचडीएफसी बैंक का शेयर बेचने के लिए मनाना बहुत मुश्किल है। एनालिस्टों का कहना है कि इसी वजह से अबुधाबी और सिंगापुर के सॉवेरन वेल्थ फंड ने अक्टूबर-दिसंबर में एचडीएफसी बैंक के शेयर खरीदे। उस समय बैंक के शेयर में करीब 9 फीसदी की गिरावट आई थी। एचडीएफसी बैंक की तरह इंफोसिस और एलएंडटी रीटेल इनवेस्टर्स के बीच ज्यादा पॉपुलर नहीं है।

आईडीबीआई कैपिटल मार्केट्स के रिसर्च हेड सोनम उदासी का कहना है, 'एफआईआई को जिन कंपनियों के कॉरपोरेट गर्वनेंस स्टैंर्डड्स पर भरोसा होता है, वे उनमें काफी पैसा लगाते हैं।' प्रमोटर ग्रुप के मुकाबले जिन छोटी कंपनियों में विदेशी निवेशकों का ज्यादा निवेश रहा है, उनका परफॉर्मेंस भी बेहतरीन रहा है। यस बैंक, करूर वैश्य बैंक, स्ट्राइड्स आकोर्लैब्स, इंडसइंड बैंक, हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियों के शेयर साल 2008 के बाद से 40-130 फीसदी तक चढ़े हैं।

जनवरी 2008 के बाद एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस के शेयर 253 फीसदी चढ़े हैं। एमके ग्लोबल के को-हेड (इंस्टीट्यूशनल इक्विटी) संदीप सिंघल का कहना है, 'अगर कोई प्रमोटर कंपनी में विदेशी निवेशकों को खुद से ज्यादा हिस्सेदारी रखने की इजाजत देता है, तो इसका मतलब यह है कि कंपनी को प्रोफेशनल तरीके से मैनेज किया जा रहा है।'

साल 2012 में करीब 80 फीसदी या ऐसे 40 में से 32 स्टॉक्स ने बेंचमार्क इंडेक्स से ज्यादा रिटर्न दिया है। इनमें आईवीआरसीएल, एनसीसी, इंडिया इंफोलाइन, युनाइटेड स्पिरिट्स और आईडीएफसी शामिल हैं। इस साल इनके शेयर 50 पर्सेंट से ज्यादा चढ़ चुके हैं। हालांकि, इनमें से ज्यादातर ने सिर्फ ऊंची विदेशी हिस्सेदारी के चलते ही अच्छा परफॉर्म नहीं किया है। पिछले साल इनमें से कइयों में तेज गिरावट आई थी। एनालिस्टों का यह भी कहना है कि सिर्फ फॉरेन इनवेस्टर्स की ज्यादा हिस्सेदारी के चलते किसी कंपनी में पैसा नहीं लगाना चाहिए।