बिपाशा बसु हैप्पी मूड में हैं। वह अपनी फिल्मों और जीवन से खुश हैं। अकेलापन उन्हें सता नहीं रहा है। कुछ नया और चैलेंजिंग करने का मौका दे रहा है। वह फिल्म और रिलेशन में एक्सप्लोर करना चाहती हैं। वह अपने व्यक्तित्व की परतों से परिचित होना चाहती हैं
प्यार की परिभाषा सिखाने के लिए बिपाशा बसु को कई दिनों तक रिहर्सल करना पड़ा और जोड़ी ब्रेकर्स के इस गाने की शूटिंग के समय अपने खास कॉस्ट्यूम के कारण घंटों स्टूल पर बैठना पड़ा। अपने नाम के गीत की अनुमति देने से पहले बिपाशा बसु बिदक गई थीं। उन्होंने निर्देशक अश्विनी चौधरी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। अश्विनी भी जिद पर अड़े थे। गीत सुनाने के साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि वह इसे किस तरह शूट करेंगे। अश्विनी ने आखिरकार उन्हें राजी कर लिया। जोड़ी ब्रेकर्स का यह गीत पॉपुलैरिटी चार्ट पर आ चुका है। हल्की मुस्कराहट के साथ बधाई स्वीकार करने के बाद उन्होंने उल्टा सवाल किया कि क्या अच्छा लगा?
पर्दे पर सेक्सुएलिटी को प्रदर्शित करना एक कला है, क्योंकि हल्की सी फिसलन से वह वल्गर हो सकता है। आप ने उसे वल्गर नहीं होने दिया। इस गाने के शूट के बारे में बताएं?
बिपाशा कहती हैं, ''कई आशंकाएं थीं मेरे मन में। पहले भी कई डायरेक्टर ऐसे आफर लेकर आए थे। वे मेरे नाम पर गीत बनाना चाहते थे। मैं हमेशा यही कहती रही कि मेरा असाधारण नाम है। मैं किसी को अपना नाम नहीं दूंगी। अश्विनी ने गाना बनाकर दिखाया। सभी को यह गाना अच्छा लगा तो मैंने उनकी खुशी के लिए हां कर दी।''
जोड़ी ब्रेकर्स नए निर्देशक और नए प्रोडक्शन की फिल्म है। फिर भी बिपाशा की यह हिस्सेदारी। क्या फिल्म में कुछ खास है, सवाल पूरा होने के पहले ही वह बोलना शुरू कर देती हैं, ''बहुत खास है। यह पहली फिल्म है, जिसे मैंने चेज किया है। इस फिल्म के साथ जुड़ी हुई हूं। मैं खुली किताब नहीं हूं, लेकिन इतनी जटिल और पर्दानशीं भी नहीं हूं। सरल सी है मेरी जिंदगी। मुझे समझना मुश्किल काम नहीं है। दो-चार बार मिलें तो आप भी एक धारणा बना सकते हैं।'' सरल होने के साथ वह विरल भी हैं कि वह स्वतंत्र स्वभाव की खुली लड़की हैं। पारदर्शी व्यक्तित्व रहा है उनका।
व्यक्तित्व के बारे में पूछने पर बिपाशा स्पष्ट शब्दों में कहती हैं, ''यह झूठ है कि बड़े होने के बाद आपका व्यक्तित्व बनता है। मेरे ख्याल में परवरिश, बचपन और माता-पिता से संबंध की प्रगाढ़ता से व्यक्तित्व सजता और शेप लेता हैं। मैं परिवार को अपने व्यक्तित्व का पूरा श्रेय देती हूं। मैं लड़की हूं, लेकिन मुझे हमेशा अपनी पसंद से कुछ भी करने की आजादी मिली। मेरे पापा आज भी मुझ पर भरोसा करते हैं। पापा मेरी पीठ पर हाथ रखकर कहते हैं कि मेरी बेटी जिम्मेदार लड़की है, वह कभी गलत नहीं हो सकती। मैंने अपनी जिंदगी जिस तरह से जी, उसमें शर्मसार होने जैसी बात नहीं रही। हां, मां थोड़ी चिंतित और परेशान हो जाती हैं। मुझे चरित्रबल माता-पिता से मिला है। मा से मैंने 'लव योरसेल्फ' की फिलॉसफी ली। यह मेरे जीवन का दर्शन है खुद से प्यार करो। अपने देश में लड़कियां और महिलाएं सबके लिए सब कुछ करती हैं, लेकिन अपनी परवाह नहीं करतीं। मां कहती हैं खुद से प्यार करने पर संतुष्टि आती है।''
बिपाशा के आत्मविश्वास को उनकी कामयाबी और स्वतंत्रता से जोड़ा जा सकता है। अगर बिपाशा फिल्मों में नहीं होतीं, क्या तब भी ऐसी ही रहतीं। वह सहमति में सिर हिलाती हैं। फिर कहती हैं, ''कांफीडेंस और अग्रेसन, यह बेसिक गुण है मेरी पर्सनैलिटी का। मैं जिंदगी के जिस क्षेत्र में भी रहती इतना तो कह ही सकती हूं कि किसी पर निर्भर नहीं रहती। मैं स्कूल में भी नंबर वन रही। मैं एकाग्र भाव से अपना काम करती हूं। मैं बहुत महत्वाकांक्षी नहीं हूं। मुझे लगता है कि आज की लड़कियों को आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना चाहिए। बचपन से ही मेरे दिमाग में यह ड्रिल कर दिया गया कि जो भी करो, खुद का करो। आप किसी के साथ बाहर जा रहे हो तो आप भी पे करो। ऐसा क्या कि हमेशा लड़का ही खर्च करे? मैं फेमिनिस्ट नहीं हूं, इंडिपेंडेट हूं। इसलिए मैं हमेशा खुश रहती हूं।''
बिपाशा आजकल राज-3 की शूटिंग कर रही हैं। यह फिल्म महेश भट्ट की देखरेख में बन रही है। बिपाशा कहती हैं, ''भट्ट फैमिली मेरे लिए खास रही है। मैंने अजनबी से शुरुआत की थी, लेकिन राज की शूटिंग के समय एक्टिंग को लेकर सीरियस हुई। महेश भट्ट और विक्रम भट्ट ने मुझे विश्वास दिलाया कि मैं एक्टिंग कर सकती हूं। फिर उनकी देखभाल में जिस्म आई। जिस्म से मुझे सेक्सी इमेज मिली। अपने लिए सेक्सी शब्द सुनना अच्छा लगता है।''
इन दिनों चर्चा है कि बिपाशा एक्सपोजर पर उतर आई हैं.. यह पूछने पर बिपाशा सवाल को टाल देती हैं, 'क्या पूछ रहे हैं आप? मैंने तो 2006 में ही बिकनी पहनी थी। मेरे पास ग्रेट बॉडी है उसे दिखाने में क्या दिक्कत है। हां, कोई करीबी कुछ बोलता है तो चोट लगती है। मैं वैक्स स्टेचू नहीं बनना चाहती। अभी एक्टिंग करनी है। एक रिलेशनशिप थी, वह खत्म हो गई। फिलहाल सिर्फ फिल्में हैं।'
रिश्तों में वक्त तो लगता है
रिलेशनशिप खत्म होने से भी उनके मन में कोई कड़वाहट नहीं है और न ही लड़कों के प्रति गुस्सा। वह कहती हैं, 'एक लड़के से संबंध खत्म हुआ तो क्या सारे लड़के खराब हो जाएंगे। मर्द की जात बहुत इंटरेस्टिंग होती है। अभी खबर चलती है कि मैंने इससे दोस्ती कर ली, उसके साथ गई..। बहुत सारे लड़के मेरे दोस्त हैं और कुछ दोस्ती करना चाहते हैं। इसमें मेरा क्या दोष है? मैं बहुत फ्रेंडली मिजाज की हूं, इसलिए जल्दी दोस्ती हो जाती है।'
मैं एक सवाल पूछती हूं, 'एक अकेली लड़की एक अकेले लड़के से मिली तो क्या मिलते ही वे ब्वॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड हो जाएंगे। कम ऑन थोड़ा तो कॉमन सेंस का इस्तेमाल करो। रिलेशन बनने में वक्त लगता है.. पहले मुलाकात होती है, फिर लड़का-लड़की एक-दूसरे को चेज करते हैं। फिर साथ समय बिताते हैं। एक-दूसरे को समझते हैं और डेटिंग होती है और फिर लव होता है। आप लोग तो रोज प्रेम करवा देते हैं और वह टूट भी जाता है। थोड़ा तो सांस लेने दो मुझे। मैं चालू रिलेशन में यकीन नहीं करती। मैं फिर से लड़कों से मिलूंगी, किसी से दोस्ती होगी। किसी से प्रेम होगा।'


