स्टार प्लस पर प्रसारित धारावाहिक 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' में सस्कारी अक्षरा जैसी ही है हिना खान की सोच। उनके लिए रिश्तों से बढ़कर नहीं है कुछ भी।
'ये रिश्ता क्या कहलाता है' में आपके किरदार अक्षरा से दर्शकों को इतना प्यार क्यों है?
आज के दौर में कैरियर और ऊंचाइया हासिल करने के चक्कर में लोग रिश्तों को तिलाजलि दे रहे हैं। यह गलत है और अक्षरा लोगों को इसी गलती का अहसास कराती है। वह लोगों को परिवार की अहमियत बताती है। वह बताती है कि ऊंचाइया हासिल करने के साथ रिश्ते-नाते भी सहेजे जाने चाहिए। इससे जिंदगी और भी खूबसूरत हो जाएगी। लोग इन सदेशों को सही मानते हैं, यही वजह है कि अक्षरा को उन्होंने लगातार प्यार दिया है।
कैसा लगता है इतनी लोकप्रियता पाकर?
मैं शुरुआत में बेहद नर्वस थी कि पता नहीं मेरा काम दर्शकों को पसद आएगा या नहीं! दर्शकों ने सीरियल बेहद पसद किया, यह जानकार मुझे बेहद खुशी होती है। जहा भी जाती हूं, लोग मुझे अक्षरा कहकर ही बुलाते हैं।
परिवार, मूल्य और सस्कारों में आप कितना यकीन रखती हैं?
मैं तो कहूंगी कि इनके बिना जिंदगी जीना व्यर्थ है। फैमिली को ताक पर रखकर मैं कैरियर बनाने वाली लड़की नहीं हूं। लोगों की नजर में भले ही यह व्यावहारिक सोच नहीं है, पर मैं ऐसी ही हूं। मेरे लिए पहले रिश्ते-नाते हैं, उनके बाद कुछ और।
अरेंज और लव मैरिज में किसे बेहतर मानती हैं ?
दोनों अपनी-अपनी जगह सही हैं। फर्क बस इतना है कि अरेंज मैरिज में अपने हमसफर को आप शादी के बाद जानते-समझते हैं, जबकि लव मैरिज में शादी से पहले। मगर शादीशुदा जिंदगी तभी सफल होगी, जब आप अपने पार्टनर के प्रति त्याग, समर्पण और एक-दूसरे पर भरोसे का भाव रखते हैं। ऐसे भाव न होने से किसी भी तरह की शादी लबी नहीं खिंच सकती। मैं अरेंज मैरिज करना पसद करूंगी।
लिव इन रिलेशनशिप पर आपका क्या स्टैंड है?
यह हर तरह से गलत है। जिम्मेदारियों से बचने और पलायनवादी प्रवृत्तिके लोग ऐसे सबधों में यकीन रखते हैं। किसी के बारे में जानने के लिए यह जरूरी नहीं है कि उसके साथ एक साथ एक कमरे में रहा जाए।
फिल्मों में कब आने का इरादा है?
फिलहाल तो 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' से फुर्सत नहीं है। मैं टीवी को पूरी तरह एंजॉय कर रही हूं। अच्छे ऑफर मिलने पर फिल्मों के बारे में सोचूंगी।
आप मानती हैं कि सास-बहू सीरियलों का दौर बीत चुका है?
जी नहीं। सास-बहू सागा दुबारा लौट रहा है। सिर्फ उनका सदर्भ बदल गया है। अब लोगों को साजिश रचती सास-बहुएं पसद नहीं हैं। वे सकारात्मक किरदार और कहानिया चाहते हैं। यही वजह है कि इन दिनों वैसे सीरियल पापुलर हैं, जिनमें सास-बहू परिवार तोड़ने नहीं जोड़ने का काम करती हैं।


